mahakal ujjain mahapuja 2025: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनि प्रदोष और धनतेरस के पावन संयोग पर भव्य महापूजन हुआ। पुरोहित परिवार ने भगवान महाकाल की विशेष आराधना कर विश्व शांति, जनकल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की। भगवान महाकाल, कुबेर देव और चांदी के सिक्कों का पूजन-अभिषेक कर पर्व का शुभारंभ किया गया।
mahakal ujjain mahapuja 2025: चांदी के सिक्कों की भेंट, कुबेर पूजन भी हुआ
इस अवसर पर महाकाल के साथ कुबेर देव और चांदी के सिक्कों का पूजन-अभिषेक किया गया। चांदी के सिक्के भगवान को अर्पित किए गए, जो धन-समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
mahakal ujjain mahapuja 2025: दीपों से जगमगाया गर्भगृह
गर्भगृह की देहरी पर दीपक अर्पित किए नंदी हॉल में सुबह 10 बजे से पूजन आरंभ हुआ, जिसमें पुरोहित समिति द्वारा गणपति पूजन, महालक्ष्मी पूजन, पंचामृत स्नान और रुद्राभिषेक संपन्न कराया गया। लगभग एक घंटे तक चली इस पूजा में संभाग आयुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। पूजन के बाद गर्भगृह की देहरी पर दीपक अर्पित कर महाकाल का आशीर्वाद लिया गया।

कुबेर देव की प्राचीन प्रतिमा का भव्य श्रृंगार
कुबेर देव का किया गया पूजन इधर, श्री सांदीपनि आश्रम परिसर स्थित 84 महादेवों में से कुंडेश्वर महादेव मंदिर में भी विशेष आयोजन हुआ। यहां गर्भगृह में स्थापित कुबेर देव की प्राचीन प्रतिमा का आभूषणों से श्रृंगार कर विशेष पूजन किया गया। साल में केवल एक बार धन त्रयोदशी पर इस प्रतिमा की पूजा होती है।
mahakal ujjain mahapuja 2025: कुबेर की नाभि में इत्र लगाया
कुबेर की नाभि में इत्र लगाया मंदिर के पुजारी शिवांश व्यास ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार धनतेरस के दिन कुबेर की नाभि में इत्र लगाने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं ने प्रतिमा की नाभि में इत्र लगाकर मिष्ठान और अनार का भोग अर्पित किया। मंदिर के शिखर पर स्थापित श्री यंत्र भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।
mahakal ujjain mahapuja 2025: शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
धन त्रयोदशी पर खरीदी के शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया कि ब्रह्म योग में धन त्रयोदशी होने के साथ ही शनि प्रदोष का संयोग भी है। शनिवार के दिन धनतेरस के पर्व काल पर गृह उपयोगी वस्तुओं की खरीदी के श्रेष्ठ मुहूर्त प्रात: दो मुहूर्त थे। अब दोपहर 2 बजे तक चंचल, दोपहर 2 बजे से 3:30 तक लाभ, दोपहर 3:30 से सांय 5 बजे तक अमृत, सायं 5:55 बजे से रात 7:25 बजे तक लाभ (इसी में प्रदोष काल का भी श्रेष्ठ समय) और रात्रि 8:55 बजे से रात 10: 25 बजे तक शुभ मुहूर्त में खरीदारी की जा सकेगी।
