
DGCA हुआ सख्त
हाल ही में झारखंड़ के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस क्रैश में 7 लोगों की मौत के बाद हवाई सफर में सुरक्षा को लेकर लोगों का डर बढ़ गया है। DGCA ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स के साथ मीटिंग में सुरक्षा से समझौता करने वालों से सख्ती से निपटने की चेतावनी दी। सेफ्टी रेग्युलेटर एजेंसी ने इसके लिए जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी को लागू करने का ऐलान किया।
ऑपरेटरों के साथ मीटिंग
DGCA ने मंगलवार को सभी ऑपरेटरों के साथ एक मीटिंग की। इसमें ऑपरेटर्स को उनके सेफ्टी रिकॉर्ड के आधार पर रैंक करने का भी प्रस्ताव रखा गया। हालांकि यह रैंकिंग DGCA की वेबसाइट पर डाली जाएगी। बता दे, नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर वे कंपनियां हैं जो नियमित टाइम-टेबल वाली कमर्शियल फ्लाइट नहीं चलाती, बल्कि जरूरत या बुकिंग होने पर ही उड़ान भरती हैं।
Aviation Regulator announces new stringent safety mandates following High-Level Meeting with Non-Scheduled Operators pic.twitter.com/1yPC49YTYd
— DGCA (@DGCAIndia) February 24, 2026
सिर्फ पायलट जिम्मेदार नहीं
अथॉरिटी अब पहले से ज्यादा रैंडम कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का ऑडिट करेगी। वहीं अनऑथराइज्ड ऑपरेशन या डेटा में गलत जानकारी का पता लगाने के लिए ADS-B डेटा, फ्यूल रिकॉर्ड और टेक्निकल लॉग को क्रॉस-वेरिफाई किया जाएगा। DGCA ने कहा, सिस्टम में नियमों का पालन न करने के लिए जिम्मेदार मैनेजर और सीनियर लीडरशिप को पर्सनली जिम्मेदार ठहराया जाएगा, सुरक्षा में हुई चूक के लिए सिर्फ पायलट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
DGCA new rules non-scheduled operators: ऑपरेटरों पर जुर्माना
DGCA ने कहा, ‘जो पायलट फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) का उल्लंघन करते हैं या सेफ्टी मिनिमा से नीचे लैंड करने की कोशिश करते हैं, उनका लाइसेंस 5 साल तक के लिए सस्पेंड हो सकता है। कम्प्लायंस स्टैंडर्ड्स को पूरा नहीं करने वाले ऑपरेटरों पर जुर्माना लगाया जाएगा और लाइसेंस/परमिट सस्पेंड किए जाएंगे। पुराने एयरक्राफ्ट और जिन विमानों की ओनरशिप में बदलाव हो रहा है, अब उनकी ज्यादा मॉनिटरिंग होगी। DGCA, उन ऑपरेटर्स का ऑडिट करेगा जो अपनी खुद की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल फैसिलिटी चलाते हैं।
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नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर के लिए नियम
- कमर्शियल हितों से ऊपर सुरक्षा को रखा जाएगा।
- पायलट का फैसला अंतिम होगा, जिसे ऑपरेटर को मानना होगा।
- सभी NSOP को वेबसाइट पर एयरक्राफ्ट की उम्र, मेंटेनेंस हिस्ट्री, पायलट का एक्सपीरियंस सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
- NSOP ऑपरेटर्स की सेफ्टी रैंकिंग जारी होगी.
- रैंडम CVR ऑडिट, ADS-B डेटा क्रॉस-चेक, टेक्निकल लॉग जांच बढ़ेगी।
- सीनियर मैनेजमेंट भी सेफ्टी उल्लंघन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार
- फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट तोड़ने वाले पायलट पर 6 महीने तक रोक लगेगी।
- पुराने एयरक्राफ्ट और ओनरशिप बदलने वाले विमानों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
- MRO की अपनी सुविधा न होने पर केवल DGCA-अप्रूव्ड आउटसोर्स मेंटेनेंस जरूरी होगा।
- मौसम संबंधी दुर्घटनाओं पर फोकस रहेगा। रियल-टाइम वेदर अपडेट सिस्टम अनिवार्य होगा।
- पायलट्स के लिए रेगुलर ट्रेनिंग और फैसला लेने की क्षमता पर जोर दिया जाएगा।
- मार्च 2026 से NSOP पर फेज-1 स्पेशल सेफ्टी ऑडिट शुरू किया जाएगा।
- सभी NSOP के लिए जरूरी सेफ्टी वर्कशॉप का आयोजन नियमित अंतराल पर होगा।
झारखंड में एयर एंबुलेंस क्रैश, सभी 7 लोगों की मौत
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