राज्य में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, और इसके कारण स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति भी गंभीर हो गई है। जबलपुर राष्ट्रीय जनित रोग नियंत्रण केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में डेंगू के मामलों में 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2022 की तुलना में चिंताजनक है। इस बीच, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें नगर निगमों की लापरवाही के कारण डेंगू के फैलने का आरोप लगाया गया है।
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हाईकोर्ट की नोटिस और नगर निगमों पर आरोप
जनहित याचिका में याचिकाकर्ता विजय बजाज की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए नगर निगमों की निष्क्रियता का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अस्पतालों की स्थिति चिंताजनक है। 10 सितंबर को जबलपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ और बिस्तरों की कमी स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि डेंगू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही, इस वर्ष डेंगू वायरस का नया वेरिएंट और भी घातक साबित हो रहा है, जिससे मृत्यु दर में भी वृद्धि हो रही है।
(जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव, नगर निगम आयुक्त भोपाल और जबलपुर को नोटिस जारी कर 10 दिन के अंदर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।
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नगर निगमों की लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य के नगर निगम फॉगिंग मशीनों का उचित उपयोग नहीं कर रहे हैं और कीटनाशकों का छिड़काव भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि स्वच्छता बनाए रखी जाए और फॉगिंग मशीनों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो डेंगू के प्रसार को रोका जा सकता है। इसके साथ ही, नगर निगमों में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी डेंगू की समस्या का एक बड़ा कारण बताया गया है, जिससे आम जनता को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में डेंगू से होने वाली मौतों में युवाओं की संख्या में विशेष वृद्धि हो रही है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।
