सुप्रीम कोर्ट में 177 पन्नों का हलफनामा दाखिल
दिल्ली दंगे 2020 की गंभीरता और इसके पीछे की साजिश को लेकर अब एक नया मोड़ सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक 177 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली में हुई हिंसा केंद्र में सत्ता परिवर्तन की साजिश के तहत की गई थी। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि दंगों का उद्देश्य देश को अस्थिर करना और भारत सरकार को कमजोर करना था।
2020 के दिल्ली दंगे: हिंसा का विस्तार
फरवरी 2020 में दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने भयंकर रूप से हिंसक रूप ले लिया था। 23 से 26 फरवरी तक राजधानी में जो हिंसा फैली, उसने कई लोगों की जान ली और हजारों को घायल किया। इस दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा और दंगे हुए, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बने।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह हिंसा किसी आकस्मिक घटनाक्रम का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। पुलिस के मुताबिक, इन दंगों का उद्देश्य केवल सड़क पर असहमति जताना नहीं था, बल्कि यह देश की संविधानिक व्यवस्था और केंद्र सरकार को कमजोर करने की कोशिश थी।
पुलिस का हलफनामा: सत्ता परिवर्तन की साजिश
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि दिल्ली दंगे का उद्देश्य न सिर्फ राजधानी में अशांति फैलाना था, बल्कि इसके जरिए केंद्र सरकार के खिलाफ संगठित आंदोलन और सत्ता परिवर्तन की साजिश रची गई थी। पुलिस ने इस हलफनामे में यह आरोप भी लगाया कि कई बड़े समूहों और नेताओं ने मिलकर इन दंगों की योजना बनाई और उसे बढ़ावा दिया।
पुलिस के अनुसार, इन दंगों को लेकर कई संगठनों का हाथ था, जो इस स्थिति का फायदा उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने इस हलफनामे के जरिए अदालत से यह आग्रह किया है कि इन मामलों की सख्ती से जांच की जाए और साजिश के मास्टरमाइंड्स को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दाखिल करते हुए अदालत से यह भी कहा कि इन दंगों के पीछे केवल स्थानीय स्तर पर लोगों को उकसाना नहीं था, बल्कि इसके पीछे वृहद स्तर पर एक बड़ी साजिश थी। पुलिस ने विभिन्न पैसिव और एक्टिव आरोपियों की पहचान की है, जिन्होंने इस हिंसा को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा, पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठन इस हिंसा को बढ़ावा दे रहे थे ताकि यह आंदोलन देशभर में फैल सके। उन्होंने इस हिंसा के पीछे एक संगठित प्रयास का जिक्र किया और यह कहा कि इस तरह के दंगे भारत की संविधानिक व्यवस्था और लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी हैं।
