एक ही दिन में सर्दी और स्मॉग ने किया बेहाल
Delhi Pollution नवंबर का महीना ठंड लेकर आया है, लेकिन इस बार सर्दी के साथ हवा में जहर भी घुल गया है। उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान अचानक गिर गया है, और साथ ही प्रदूषण ने सांस लेना तक मुश्किल कर दिया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब हर जगह सुबह-शाम गलन भरी ठंड और आंखों में चुभती धुंध ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।

राजस्थान के 9 शहरों और मध्य प्रदेश के 8 शहरों में बुधवार को न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया। भोपाल लगातार पांच दिनों से 8 डिग्री पर ठिठुर रहा है। वहीं, हरियाणा के नारनौल में पारा 7.7 डिग्री तक गिर गया।
दिल्ली में दोहरी मार: ठंड भी, जहर भी
दिल्ली में हालात और भी खराब हैं। तापमान 10.4 डिग्री पर पहुंच गया जो सामान्य से 3.1 डिग्री कम है। लेकिन असली चिंता ठंड नहीं, बल्कि हवा की है। राजधानी में बुधवार को AQI 400 से पार हो गया। बवाना का एयर क्वालिटी इंडेक्स 451, चांदनी चौक का 449, और इंडिया गेट क्षेत्र का 408 दर्ज किया गया। धुंध इतनी घनी थी कि इंडिया गेट भी परदे के पीछे गायब नजर आया।
कर्तव्य पथ और लुटियन जोन में हवा में झिलमिलाते धुएं की परतें साफ देखी जा सकती थीं। लोग सुबह की सैर पर निकले, लेकिन कुछ ही मिनटों में आंखों में जलन और गले में खराश ने उन्हें घर लौटने पर मजबूर कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि “स्थिति इतनी गंभीर है कि अब सिर्फ मास्क पहनने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।” कोर्ट ने पूछा कि आखिर सरकारें साल-दर-साल वही गलतियां क्यों दोहराती हैं। पराली, धूल और वाहनों के धुएं पर रोक के बावजूद हवा में सुधार नहीं दिखता।
राज्यों में शीतलहर का असर: सड़कों पर सन्नाटा
राजस्थान और मध्य प्रदेश में सर्दी का असर अब गांवों तक पहुंच चुका है। सुबह खेतों पर ओस जम रही है और लोगों ने अलाव जलाकर राहत तलाशनी शुरू कर दी है। राजस्थान के चुरू, श्रीगंगानगर, अजमेर और जयपुर में तापमान 9 डिग्री के आसपास है। मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में भी रातें 8 से 9 डिग्री के बीच हैं। स्कूलों में बच्चों के लिए देरी से शुरू होने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। अस्पतालों में सर्दी-खांसी के मरीज बढ़ रहे हैं।
सरकार की कोशिशें और जनता की चिंता
दिल्ली में प्रशासन ने एंटी-स्मॉग गन से पानी का छिड़काव शुरू किया है ताकि हवा में मौजूद धूल के कण कुछ कम हों। कई इलाकों में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया गया है। लेकिन सवाल वही है क्या यह सब काफी होगा? हर साल नवंबर आते-आते राजधानी गैस चेंबर में बदल जाती है। लोग मास्क पहनते हैं, मशीनें चलती हैं, लेकिन हवा फिर भी साफ नहीं होती।
निष्कर्ष: ठंड तो गुज़र जाएगी, पर क्या हवा कभी साफ होगी?
सर्दी हर साल लौटती है, लेकिन इस बार यह हमें सिर्फ कांपने पर नहीं, सोचने पर भी मजबूर कर रही है। हवा में मिला यह जहर अब सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, अस्तित्व का सवाल बन गया है। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी स्पष्ट है अब वक्त बहस का नहीं, कदम उठाने का है। अगर सरकारें और लोग दोनों नहीं जागे, तो आने वाले सालों में सर्दी की ठिठुरन से ज्यादा दमघोंटू हवा डराएगी।
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