सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपने पिछले आदेश में संशोधन किया है. अब कुत्तों की नसबंदी के बाद उन्हें उसी जगह छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था. इसके साथ ही हिंसक कुत्तों को नहीं छोड़ने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर उन्हें भोजन नहीं दिया जा सकता है.
ये फैसला बदला
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त के उस निर्देश पर रोक लगा दी है जिसमें कहा गया था कि जिन आवारा कुत्तों को पकड़ा गया है उन्हें छोड़ा नहीं जाना चाहिए।कोर्ट ने कहा, कुत्तों को सार्वजनिक रूप से खाना देने की अनुमति नहीं है। आवारा कुत्तों खाना खिलाने के लिए अलग से जगह बनाई जाएंगी।14 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की स्पेशल बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने 11 अगस्त को डॉग बाइट्स और रेबीज के मामलों को देखते हुए सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों में दिल्ली-NCR के आवासीय क्षेत्रों से हटाकर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था।
अब अक्टूबर में सुनवाई
जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा- इसके लिए नेशनल लेवल पर एक नीति बननी चाहिए। हमने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया है।देश के बाकी हाईकोर्ट में जहां भी मामले लंबित हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए। अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद अक्टूबर 2025 के लिए लिस्ट कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले
आवारा कुत्तों को नसबंदी के बाद छोड़ा जाएगा।
रेबीज से संक्रमित और हिंसक कुत्ते शेल्टर होम में ही रहेंगे।
कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं कराया जा सकेगा फीडिंग।
यह आदेश अब केवल दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू होगा।
देश की सभी अदालतों में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने स्थानांतरित किया।
आवारा कुत्तों को लेकर नेशनल पॉलिसी बनाई जाएगी।
नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगेगा।
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