Delhi liquor scam: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, जिससे उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि, अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं. केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट में पेश होना होगा, और फिलहाल वे अपने कार्यालय नहीं जा सकेंगे, न ही किसी सरकारी फाइल पर हस्ताक्षर कर सकेंगे। इससे पहले, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी जमानत मिल चुकी है, और उन्होंने कहा था कि जल्द ही अरविंद केजरीवाल को भी जमानत मिल सकती है।
इसके अलावा, बीआरएस नेता के. कविता, राज्यसभा सांसद संजय सिंह और आम आदमी पार्टी के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर को भी जमानत मिल चुकी है। हालांकि, दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े कुछ आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं—विनोद चौहान, अरुण पिल्लई, अमनदीप ढल्ल और समीर महेंद्रू। आइए जानते हैं इन आरोपियों के बारे में विस्तार से
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1. विनोद चौहान:
विनोद चौहान को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी नौवीं चार्जशीट में आरोपी बनाया था और मई में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने हवाला के जरिए आम आदमी पार्टी के लिए गोवा विधानसभा चुनाव 2022 के प्रचार के लिए 25.5 करोड़ रुपये भेजे थे। जांच एजेंसियों ने उनके घर से 1.06 करोड़ रुपये की नकदी भी बरामद की थी। फिलहाल, उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रही है।
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2. अरुण पिल्लई:
हैदराबाद के कारोबारी अरुण पिल्लई का नाम सीबीआई की चार्जशीट में मनीष सिसोदिया के साथ दर्ज किया गया था। उन्हें मार्च 2023 में ईडी ने गिरफ्तार किया था। आरोप है कि वे साउथ लॉबी से जुड़े थे और 100 करोड़ रुपये की किकबैक का आदान-प्रदान किया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के साथ-साथ दिल्ली में शराब लाइसेंस के लिए रिश्वत देने का भी आरोप है। उनकी जमानत याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने जून में अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
3. अमनदीप ढल्ल:
दिल्ली के व्यवसायी अमनदीप ढल्ल को सीबीआई ने अप्रैल 2022 में गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने विजय नायर के साथ मिलकर साउथ लॉबी की बैठक आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जून 2023 में जमानत देने से मना कर दिया था।
4. समीर महेंद्रू:
समीर महेंद्रू, इंडोस्पिरिट कंपनी के एमडी हैं। उन्हें सितंबर 2022 में ईडी ने गिरफ्तार किया था। इंडोस्पिरिट में उनकी 35 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, और इस कंपनी को दिल्ली सरकार से थोक एल1 का लाइसेंस मिला था। उनकी जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में मामला लंबित है। जनवरी 2023 में उन्हें 43 दिनों की अंतरिम जमानत मिली थी, लेकिन उनकी परमानेंट जमानत की अर्जी अभी भी विचाराधीन है।
दिल्ली शराब घोटाले में अब भी कई आरोपियों पर जांच और सुनवाई जारी है।
