Rajpal Yadav Bail Plea Rejected: चेक बाउंस मामले में बाकी रकम चुकाने के लिए की गई अतिरिक्त समय की मांग को दिल्ली हाईकोर्ट खारिज कर दिया है।
बता दें कि, 2 अप्रैल को इस मामले पर सुनवाई हुई इस दौरान राजपाल यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिक के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए।
सुनवाई के दौरान राजपाल हुए भावुक
रिपोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव ने दिल्ली कोर्ट से बाकी बचे 6 करोड़ चुकाने के लिए 30 दिन का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि- “नहीं मतलब नहीं। फैसला सुरक्षित रखा जा रहा है और समय नहीं मिलेगा। यदि पेमेंट करने की इच्छा है तो देरी क्यों हो रही है।”

कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि-
“आप कह रहे हैं कि आप पेमेंट करना चाहते हैं, लेकिन आपके वकील कह रहे हैं कि जेल जा चुके हैं, इसलिए पेमेंट नहीं करेंगे। अगर आप पेमेंट करना चाहते हैं, तो फिर मामले की सुनवाई क्यों हो रही है। पेमेंट कर दीजिए।”
शिकायतकर्ता पक्ष का बयान
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि- ‘सजा पूरी करने से वित्तीय देनदारी खत्म नहीं होती। वकील अवनीत सिंह सिक्का ने दलील दी कि राजपाल यादव 10 करोड़ रुपए का पेमेंट नहीं करने की बात स्वीकार कर चुके हैं।’
‘पेमेंट न होने के बाद ही कार्यवाही शुरू की गई। कुल 7.75 करोड़ रुपए अभी भी बकाया हैं, जबकि ट्रायल कोर्ट से पहले करीब 2 करोड़ रुपए जमा किए गए थे।’
कोर्ट ने संकेत दिया कि- ‘यदि कम समय में 6 करोड़ रुपए दिए जाएं तो विवाद सुलझ सकता है, जिस पर शिकायतकर्ता भी सहमत दिखा।’

राजपाल ने कहा कि-
“उन्होंने मुझसे 17 करोड़ रुपए ले लिए हैं। मेरे पांच फ्लैट बेचने पड़े हैं। मैं फिर से कोर्ट जाने के लिए तैयार हूं। मैं भावुक नहीं हूं, मुझे पांच बार और जेल भेज दो।”
जेल में क्यों थे एक्टर
राजपाल यादव फिलहाल दिल्ली की तिहार जेल में बंद हैं। यह मामला 2010 से चला आ रहा है, जब उन्होंने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। फिल्म फ्लॉप हो गई, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और वे समय पर कर्ज नहीं चुका सके। लोन के समय दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
दोनों पक्षों के बीच कई बार समझौते हुए, लेकिन पूरी रकम का भुगतान नहीं हो सका। समय के साथ ब्याज जुड़ते जाने से कुल राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये हो गई। 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया और छह महीने की सजा सुनाई, जिसमें से उन्होंने तीन महीने जेल में काटे। उसके बाद हाई कोर्ट में अपील की गई, जहां उन्हें कई बार राहत मिली क्योंकि उन्होंने भुगतान करने का वादा किया। हालांकि, बार-बार अदालती निर्देशों का पालन न करने के कारण दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी 2026 में उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया।
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