
delhi airport cyber attack: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) में 7 नवंबर को तकनीकी खराबी ने हड़कंप मचा दिया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के ऑटोमैटिक मैसेज स्विच सिस्टम (AMSS) में अचानक खराबी आने से फ्लाइट संचालन लगभग 12 घंटे बाधित रहा। इसके कारण 800 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स में देरी हुई और 20 उड़ानों को रद्द करना पड़ा। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है।
delhi airport cyber attack: गुरुवार की शाम से सिस्टम में गड़बड़ी शुरू हुई थी
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार की शाम से सिस्टम में गड़बड़ी शुरू हुई थी। शुक्रवार सुबह 9 बजे तक यह पूरी तरह फेल हो गया। एयरपोर्ट पर लंबी कतारें लग गईं, हजारों यात्री परेशान हुए। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने शाम 8:45 बजे बताया कि सिस्टम अब पूरी तरह ठीक है। हालांकि, इस तकनीकी खराबी का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई, भोपाल, चंडीगढ़, अमृतसर समेत कई एयरपोर्ट्स पर भी उड़ानों में देरी देखी गई।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल के सूत्रों का कहना है कि AMSS सिस्टम में इतनी लंबी देरी के साथ फेल होना पहली बार देखा गया है। इसके कारण विशेषज्ञों ने साइबर हमला होने की संभावना जताई है। एक टर्मिनल से शुरू हुई समस्या पूरे एयर ट्रैफिक नेटवर्क को प्रभावित कर गई। ATC गिल्ड ऑफ इंडिया ने बताया कि जुलाई 2025 में ही उन्होंने ऑटोमेशन सिस्टम में खामियों और अपग्रेड की आवश्यकता को लेकर AAI को अलर्ट किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सभी फ्लाइट्स में औसतन 50 मिनट की देरी
फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित होने से इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, स्पाइसजेट और अकासा एयरलाइंस सहित कई एयरलाइंस के शेड्यूल में बदलाव हुआ। फ्लाइटरडार24 के अनुसार, सभी फ्लाइट्स में औसतन 50 मिनट की देरी हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीकी गड़बड़ी से सिर्फ पैसेंजर्स ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट की सुरक्षा और समग्र एयर ट्रैफिक नेटवर्क पर भी गंभीर असर पड़ता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक एयरपोर्ट्स में ATC सिस्टम पूरी तरह नेटवर्क से जुड़े होते हैं। किसी भी तरह की कोऑर्डिनेटेड गड़बड़ी या हैकिंग से पूरे एयरपोर्ट का संचालन बाधित हो सकता है। इस घटना के मद्देनजर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी संबंधित एजेंसियों को शामिल किया गया। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कहीं बाहरी ताकतों का हाथ तो नहीं था।
इतिहास में भारत में कई बार एयरपोर्ट सिस्टम में तकनीकी खराबियां आई हैं, लेकिन इतनी बड़ी और लंबी देरी वाली घटना दुर्लभ है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एयरपोर्ट नेटवर्क और AMSS सिस्टम की सुरक्षा और अपडेट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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