Daycare Safety for Children: शहरों में आजकल महिला हो या पुरुष सभी जॉब करते है, जिसकी वजह से उन्हें अपने बच्चों को डेकेयर में भेजना पड़ता है कि जब तक वो बाहर काम पर रहे हो तो उनके बच्चों की देखभाल होती रहे। लेकिन उनकी डेकेयर में सही से देखभाल हो रही है या नहीं ये जानना भी जरुरी है। एक्सपर्ट बताते हैं कि माता – पिता को डेकेयर भेजते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि पता चल सके उनका बच्चा वहां सुरक्षित है या नहीं?
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मानसिक दबाव तो नहीं झेल रहा बच्चा दें ध्यान?
शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों के मानसिक बदलावों पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये संकेत देते हैं कि बच्चा डेकेयर में सुरक्षित माहौल में नहीं है। उदाहरण के लिए, बच्चा अचानक चुपचाप रहने लगे या डरने लगे, खेल और दोस्तों से दूरी बनाए, लगातार उदास या परेशान दिखाई दे, या खाने-पीने और नींद की आदतों में कमी आए।
सूत्रो के अनुसार, डॉ. सुमीत चक्रवर्ती (एशियन हॉस्पिटल, पीडियाट्रिक्स) के अनुसार, ये संकेत माता-पिता को यह चेतावनी देने के लिए हैं कि डेकेयर में संभावित सुरक्षा समस्याएं हो सकती हैं और समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है।
बच्चों के शरीर पर मार – पीट के निशान तो नहीं?
डेकेयर में बच्चों की सुरक्षा का सबसे पहला पहलू है उनका शारीरिक स्वास्थ्य। माता-पिता को बच्चों के शरीर पर बार-बार चोट या घाव, नीले-पीले निशान दिखाई देने पर गंभीरता से सोचना चाहिए। यह केवल खेल-कूद की वजह से नहीं, बल्कि किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है। ये भी हो सकता है कि वहां बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार न किया जाता हो।

डॉ. प्राची गुप्ता (मदरलैंड हॉस्पिटल, पीडियाट्रिक्स) के अनुसार..
“अगर बच्चा लगातार चोटिल हो रहा है या असामान्य निशान दिख रहे हैं, तो यह चिंता का कारण है। माता-पिता को समय रहते इस पर ध्यान देना चाहिए।”
बच्चे से हर दिन बात करें पूछें उसने वहां क्या – क्या किया?
जब बच्चा डेकेयर से वापस आजाए तो माता – पिता को उनसे बातचीत करना चाहिए उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। जब वो कुछ बताएं तो उसे ध्यान से सुने, जिससे बच्चे को लगे कि उसके पैरेंट्स उसकी बात सुन रहें, जिससे कभी कोई समस्या हो तो वो बेझिझक बता सके।

डेकेयर की अच्छे से जांच करें…
बच्चे को डेकेयर में भेजने से पहले वहां के कर्मचारियों के स्वाभाव और योग्यता के बारें में जान लें, जो लोग वहां पहले से आ रहें हैं उनका फीडबैक लें। डेकेयर की साफ-सफाई और सुरक्षा इंतजाम देखें। बच्चे की दिनचर्या और गतिविधियों की जानकारी लें। ये भी देखे की बच्चे को कोई नींद की दवा तो नहीं दी जा रही। जरूरत पड़े तो सीसीटीवी कैमरों और निगरानी व्यवस्था की पुष्टि करें।

बच्चे में भरोसा और प्यार बढ़ाएं….
माता-पिता की सजगता ही बच्चे की सबसे बड़ी सुरक्षा है। बच्चों को प्यार और भरोसा देना उतना ही जरूरी है जितना उनकी शारीरिक देखभाल। उन्हें अपने बचपन की बातें बताएं और उनकी सुने, जिससे दोस्ती वाला रिश्ता आपके बच्चे के साथ बन सके।
एक खुश और सुरक्षित बच्चा ही सीखने और बढ़ने में सफल होता है। माता-पिता के समय पर उठाए गए कदम बच्चे की खुशहाली और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
