Datia’s Soldier Injured On Border : 130 गोले दागे, तभी पैर में लगी गोली फिर भी नहीं हटा पीछे
Datia’s Soldier Injured On Border : घाटी में पुंछ सीमा पर पाकिस्तानी फायरिंग में शिवपुरी के जवान रविन्द्र सिंह परमार गोली लगने से घायल हो गए. उन्होंने पाकिस्तानी ड्रोन हमले को नाकाम करते हुए 130 से ज्यादा गोले दागे. जवान के घायल होने की खबर के बाद परिवार से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया. साथ ही जवान से भी बात की.
जवान ने सीमा पर ही मार गिराए पाकिस्तानी ड्रोन
जम्मू-कश्मीर के पुंछ बॉर्डर सहित कई जगहों से पाकिस्तान की ओर से लगातार फायरिंग की जा रही है. इसी फायरिंग में शिवपुरी के करैरा विधानसभा के जनौरी गांव में रहना वाला एक जवान पैर में गोली लगने से घायल हो गया है. जवान के घायल होने की जानकारी होने के बाद करैरा विधायक रमेश प्रसाद खटीक ने घायल जवान के परिवार से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया और जवान से भी बात की. जवान ने घायल होने से पहले तोप की कमान संभालते हुए पाकिस्तान के कई ड्रोन को भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही मार गिराया था.
जवान रविंद्र के पैर में लगी गोली
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद 7-8 मई की दरम्यानी रात पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिश हुई। मुठभेड़ के दौरान रविन्द्र सिंह ने अदम्य साहस दिखाते हुए घुसपैठियों को माकूल जवाब दिया। दुश्मन की एक गोली रविन्द्र के पैर में जा फंसी, जिसे बाद में ऑपरेशन कर निकाला गया। घायल सैनिक का जज्बा अभी भी मजबूत है- वे जल्द ही फिर से ड्यूटी पर लौटना चाहते हैं।
जवान बोला कुछ नहीं हुआ सब ठीक है
यह सुनते ही एक पल को तो लगा जैसे जमीन खिसक गई हो। कांपती आवाज में मैंने पूछा- तुम्हारी हालत कैसी है? वह गर्व से बोला- ‘ज्यादा कुछ नहीं हुआ, जल्द ठीक हो जाऊंगा। उसके ये शब्द सुनकर मेरा सीना चौड़ा हो गया। उसने हमें और गौरव महसूस करवाया। उसने आगे कहा- भाईसाहब जैसे ही ठीक हो जाऊंगा, फिर से दुश्मनों से मुकाबला करूंगा।
बचपन से है देश सेवा का जज्बा
बचपन से है देश सेवा का जज्बा जगभान ने बताया कि रविन्द्र को बचपन से ही देश सेवा का जज्बा है। वह भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद जैसे वीर शहीदों को अपना आदर्श मानता है। रविंद्र के दो बेटे हैं। वे भी बड़े होकर सेना में जाना चाहते हैं।
12 मई को घर आने वाला था रविंद्र
घर लौटने की थी तैयारी रविन्द्र 12 मई को अपने घर आने वाले थे, लेकिन अब उनकी छुट्टी रद्द कर दी गई है। परिवार के अनुसार वे दिसंबर-जनवरी में 40 दिन की छुट्टी लेकर घर आए थे और इस बार बच्चों से वादा किया था कि फिर से मिलेंगे, लेकिन देश सेवा पहले है। यही वजह है कि परिवार पूरी तरह से इस स्थिति को समझ रहा है और गर्व से हर दिन उनके स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है। पूरे गांव को उन पर गर्व है।
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