दार्जिलिंग की काली सुबह: जब नींद में समा गई ज़िंदगी

जब पहाड़ ने सब कुछ निगल लिया
Darjeeling Landslide Cyclone: पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की सुबह कभी इतनी भयावह नहीं रही। वो इलाका, जो अपने बादलों और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है, अब मलबे और चीखों से गूंज रहा है। पिछले 24 घंटे में यहां लगातार हो रही बारिश ने तबाही मचा दी। मिरिक-सुखियापोखरी रोड के किनारे अचानक पहाड़ी दरक गईघर, गाड़ियां, और मासूम ज़िंदगियां सब कुछ मिट्टी में समा गया।
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स्थानीय लोग बताते हैं “रात को तेज़ आवाज़ आई, जैसे कोई पहाड़ फट गया हो। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका मलबे में दब गया। सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक़, अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन स्थानीय लोग कह रहे हैं कि संख्या इससे ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग अभी भी लापता हैं।
Darjeeling Landslide Cyclone: सड़कें टूटीं, पुल बहादार्जिलिंग का संपर्क देश से टूटा
मिरिक में एक पुराना लोहे का पुल भी टूट गया है, जिससे दार्जिलिंग का कई इलाकों से संपर्क पूरी तरह कट गया है। सड़कें फिसलन भरी हैं, जगह-जगह मलबा पड़ा है और रेस्क्यू टीमें लगातार संघर्ष कर रही हैं। तीस्ता नदी भी इस वक्त उफान पर है तीस्ताबाजार के पास बलुखोला में पानी इतना बढ़ गया कि सिलिगुड़ी, सिक्किम और कालिम्पोंग को जोड़ने वाला हाईवे पूरी तरह बंद करना पड़ा।
Darjeeling Landslide Cyclone: रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती यही हैपहुंच ही नहीं पा रहे। फोन नेटवर्क ठप हैं, बिजली के तार टूट चुके हैं। लोग पहाड़ी इलाकों में फंसे हुए हैं और मदद का इंतज़ार कर रहे हैं।
Darjeeling Landslide Cyclone: दूसरी तरफ सागर में ‘शक्ति’एक और तूफान की दस्तक
जब दार्जिलिंग पहाड़ों में बारिश तबाही मचा रही थी, उसी वक्त अरब सागर में साइक्लोन शक्ति भी अपना रूप ले रहा था। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक़, यह तूफान गुजरात के द्वारका से लगभग 420 किलोमीटर दूर समुद्र में एक्टिव है और 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चला रहा है।

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महाराष्ट्र और गुजरात दोनों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में समुद्र उफान पर है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 7 अक्टूबर तक भारी से बहुत भारी बारिश और तेज़ हवाएं चलेंगी।
Darjeeling Landslide Cyclone: तैयारियों में जुटा प्रशासन
महाराष्ट्र सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क कर दिया है। डिज़ास्टर मैनेजमेंट सिस्टम एक्टिव कर दिया गया है, ताकि निचले इलाकों से नागरिकों को समय रहते निकाला जा सके। मछुआरों को 7 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। गोवा के निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
एक अधिकारी ने बताया“हमारी सबसे बड़ी चिंता लोगों की सुरक्षा है। साइक्लोन शक्ति का असर जितना अरब सागर में दिख रहा है, उतना ही ज़मीनी इलाकों में भी पड़ सकता है।
Darjeeling Landslide Cyclone: दार्जिलिंग की तस्वीरें देखकर दिल कांप उठता है।
मलबे में दबे घर, टूटी सड़के, और मासूम बच्चे जो बारिश को कभी खुशियों से जोड़ते थेआज उसी बारिश से उनका घर उजड़ गया। ये सिर्फ एक खबर नहीं, ये एक याद दिलाने वाली चेतावनी है कि प्रकृति से खिलवाड़ की हर कीमत बहुत भारी होती है। हर साल बढ़ते मौसमीय बदलाव, अनियोजित निर्माण और जंगलों की कटाईइन सबने हिमालयी क्षेत्रों को अस्थिर बना दिया है। दार्जिलिंग का यह हादसा शायद आखिरी नहीं होगा, अगर हमने अब भी चेतना नहीं दिखाई।
