dalai lama successor announcement china tibetan buddhism 2025: दलाई लामा ने किया उत्तराधिकारी के बारे में अहम ऐलान
dalai lama successor announcement china tibetan buddhism 2025: निःसंदेह तिब्बती बौद्ध धर्म और चीन के बीच गहरे राजनीतिक विवाद के बीच, दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी के बारे में एक बड़ा ऐलान किया है।
दलाई लामा ने स्पष्ट किया कि उनके उत्तराधिकारी का जन्म चीन के बाहर होगा, और उन्होंने चीन समर्थित उत्तराधिकारी के चुनाव के खिलाफ भी अपना विरोध जाहिर किया। यह बयान विशेष रूप से तब आया है जब वह जल्द ही 90 वर्ष के हो रहे हैं।
दलाई लामा ने कहा, “मैंने 1969 में पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि दलाई लामा के पुनर्जन्म को लेकर तिब्बती समुदाय को यह तय करना होगा कि यह परंपरा जारी रखनी चाहिए या नहीं।” लेकिन अब उन्होंने अपने अनुयायियों को आश्वस्त किया कि यह परंपरा जारी रहेगी, और उनके उत्तराधिकारी का चयन गादेन फोडरंग ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा, जो उनके कार्यालय का आधिकारिक हिस्सा है।
संस्था जारी रहेगी, चीन की मंशाओं को चुनौती
दलाई लामा ने स्पष्ट रूप से कहा कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट के अलावा किसी भी अन्य संस्था या सरकार को उनके उत्तराधिकारी के चयन में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। यह बयान चीन के प्रयासों को सीधे चुनौती देता है, जहां वे दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन अपने तरीके से करना चाहते हैं।
चीन दलाई लामा को ‘विभाजनवादी’ मानता है, क्योंकि 1959 में तिब्बत से उनके निर्वासन के बाद, वह लगातार तिब्बत के स्वतंत्रता की बात करते रहे हैं। बीजिंग का कहना है कि वह दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन करेगा, जबकि दलाई लामा ने इससे साफ इनकार करते हुए कहा कि उनका उत्तराधिकारी चीन के बाहर ही होगा।
Statement Affirming the Continuation of the Institution of Dalai Lama
(Translated from the original Tibetan)
On 24 September 2011, at a meeting of the heads of Tibetan spiritual traditions, I made a statement to fellow Tibetans in and outside Tibet, followers of Tibetan… pic.twitter.com/VqtBUH9yDm
— Dalai Lama (@DalaiLama) July 2, 2025
कहाँ मिलेगा, दलाई लामा का उत्तराधिकारी ?
दलाई लामा ने यह भी कहा कि वे अपने उत्तराधिकारी का स्थान खोजने के लिए भारत में ही अपने पुनर्जन्म की संभावना देख रहे हैं। उनका मानना है कि उनकी मृत्यु के बाद, तिब्बती बौद्ध समुदाय और अन्य धार्मिक लामा यह तय करेंगे कि उनका अगला पुनर्जन्म कहाँ और कैसे होगा।
दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी को लेकर पारंपरिक तिब्बती बौद्ध विश्वासों का हवाला देते हुए कहा कि यह एक आध्यात्मिक प्रक्रिया होगी, जिसमें एक प्रबुद्ध भिक्षु के रूप में उनका पुनर्जन्म होगा।
उत्तराधिकारी का चुनाव अब तिब्बती समुदाय का अधिकार
चीन के लिए यह बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है। बीजिंग ने पहले दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी, लेकिन दलाई लामा ने इसके खिलाफ दृढ़ता से विरोध किया है।
दलाई लामा ने पहले ही 1969 में इस मुद्दे पर एक बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि उनके उत्तराधिकारी का चयन तिब्बती बौद्ध परंपराओं और उनके अनुयायियों द्वारा किया जाएगा। अब उन्होंने अपने इस बयान को पुनः दोहराते हुए, चीन के किसी भी हस्तक्षेप को नकारा।
बयान: ‘उत्तराधिकारी का जन्म चीन के बाहर होगा’
दलाई लामा ने कहा कि, “मुझे विश्वास है कि मेरे उत्तराधिकारी का जन्म चीन के बाहर होगा, क्योंकि तिब्बत में हम जिस तरह की धार्मिक स्वतंत्रता का पालन करते हैं, वह चीन में संभव नहीं है।” उन्होंने अपने अनुयायियों से यह भी आग्रह किया कि वे बीजिंग द्वारा चुने गए किसी भी व्यक्ति को अस्वीकार कर दें।
यह फैसला तिब्बतियों के लिए एक बड़ी राहत हो सकता है, जो चीन की तानाशाही नीतियों के कारण अपने धर्म और सांस्कृतिक स्वतंत्रता के अधिकारों से वंचित रहे हैं। दलाई लामा ने तिब्बतियों को हमेशा धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया है।
सुरक्षा और धर्म: दलाई लामा की संस्था का भविष्य
अब, दलाई लामा ने यह घोषणा की है कि उनकी संस्था का भविष्य सुरक्षित रहेगा, और आने वाले वर्षों में यह परंपरा जारी रहेगी। तिब्बत और भारत में रहने वाले उनके अनुयायी इस निर्णय को लेकर आध्यात्मिक शांति महसूस कर सकते हैं, क्योंकि यह धार्मिक विश्वासों और परंपराओं के सम्मान का प्रतीक है।
चीन और दलाई लामा
यह विवाद न केवल धार्मिक विश्वासों का है, बल्कि यह राजनीतिक संघर्ष का भी हिस्सा है। दलाई लामा के नेतृत्व में तिब्बती स्वतंत्रता संघर्ष और चीन के खिलाफ विरोध ने इस मामले को और भी जटिल बना दिया है। चीन की सरकार ने दलाई लामा को अलगाववादी मानते हुए उनके उत्तराधिकारी के चयन में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है।
दलाई लामा की यह घोषणा तिब्बत के धार्मिक भविष्य और चीन के साथ चल रहे संघर्ष का महत्वपूर्ण मोड़ हो सकती है। उनका उत्तराधिकारी चीन के बाहर होने का निर्णय तिब्बती समुदाय की आध्यात्मिक स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह कदम न केवल दलाई लामा की संस्था के भविष्य को सुनिश्चित करता है, बल्कि तिब्बती बौद्ध धर्म की परंपराओं को भी सशक्त बनाता है।
Watch Now :- अब ट्रेन का इंतज़ार बन जाएगा एक शानदार अनुभव!
Read More :- कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप केस: आरोपी शिक्षक की नौकरी गई, 2 स्टूडेंट सस्पेंड
