Dacoit Madho Singh: 1960 के बाद चम्बल के बीहड़ों में पुलिस जाने से डरती थी
Dacoit Madho Singh: चंबल के बीहड़ो में एक ऐसा डकैत भी हुआ जिसने पुलिस को खुली चुनौती दी और उसके डर से पुलिस बीहड़ों की तरफ जाने से भी डरती थी. सेना में लम्बी नौकरी करने के बाद जब वो चंबल में उतरा तो आधुनिक हथियारों की बाड़ ले आया और पूरी गैंग को नए हथियारों से लैस कर दिया।
हम बात कर रहे हैं 1960 के दशक के बड़े कुख्यात डकैत माधौ सिंह की, माधौ सिंह भी दुश्मनी के चलते बीहड़ पहुंचा, लेकिन वो शुरू से ऐसा नहीं था. तो चलिए आपको बताते हैं डाकू माधौ सिंह की कहानी नैशन मिरर की जुबानी।
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Dacoit Madho Singh: जन्माष्टमी के दिन किसान के परिवार में खुशियों के लहर आई जब माधौ सिंह का जन्म हुआ और जगह थी उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के अंतर्गत आने वाले पिनाहट थाना क्षेत्र के गढ़िया बघरैना गांव जन्माष्टमी के दिन जन्म लेने की वजह से बच्चे का नाम माधव सिंह रखा. लेकिन गांव के लोग उसे माधौ सिंह के नाम से बुलाने लगे दरअसल माधौ सिंह को शुरू से ही बड़ा आदमी बनने की धुन थी,वो पढ़ने-लिखने में काफी होशियार और खेलकूद में माहिर था. जमीन जायदाद होने की वजह से गांव के लोग माधौ सिंह की इज्जत भी करते थे. माधौ सिंह ने मेहनत की और फौज को चुना।
Dacoit Madho Singh: डाकू मोहर सिंह से मिलने के बाद डाकू बने माधौ सिंह

Dacoit Madho Singh: माधौ सिंह को फौज में कंपाउडर बने, लगभग 7 से 8 साल तक जवानों की सेवा की. फिर लंबी छुट्टी लेकर गाँव आए और गाँव आ कार उन्होंने लोगों का इलाज किया। लेकिन अचानक माधौ सिंह की लोकप्रियता तब खत्म हुई जब उनपे चोरी का इल्जाम लगा और उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
लेकिन चम्बल में कहते हैं की दुश्मनी की आग तब तक नही भुजती जब तक बदला न लिया जाए और बस फिर यह से शुरू हुई फौजी माधौ सिंह की डाकू माधौ सिंह में बदलने की कहानी और वो मिले उस समय के बड़े डकैत मोहर सिंह से जिसने उन्हे बंदूक थमा दी और अपने साथ बीहड़ों में ले गए।
Dacoit Madho Singh: माधौ सिंह का आतंक इन राज्यों में था

Dacoit Madho Singh: एसएलआर और राइफल चलाने में माहिर माधौ सिंह ने कुछ दिन बीहड़ में गुजारे. सबसे पहले गांव के 3 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. फिर कभी गाव की तरफ पीछे मुड़कर नहीं देखा। माधौ सिंह का आतंक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तीनों राज्यों में था। माधौ सिंह लगभग 500 अपहरण और 23 हत्याओं के केस चले।
Dacoit Madho Singh:1960 से 1972 तक चंबल के बीहड़ में माधौ सिंह भौकाल

बताते थे हैं की 1960 से1972 तक चंबल के बीहड़ में माधौ सिंह भौकाल जबरदस्त था और पुलिस ने माधौ सिंह पर लगभग डेढ़ लाख रुपये का इनाम भी रख दिया था. डाकू माधौ सिंह के पास एक से एक आधुनिक हथियार थे और सेना में रहकर उन्होंने इन्ही हथियार चलाने की ट्रैनिंग ले रखी थी | लोग बताते हैं कि 13 मार्च 1971 को माधौ सिंह गैंग और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई | मुठभेड़ में माधौ सिंह की गैंग के 13 डकैत मारे गये।
लोक नायक ने बदला मन
Dacoit Madho Singh: लोक नायक जयप्रकाश से डाकू माधौ सिंह से संपर्क किया और बीहड़ की जीवन छोड़ मुख्यधारा में आने को मनाया. आखिरकार अप्रैल 1972 में माधौ सिंह ने अपने लगभग 500 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया और हथियार डालकर डकैत के जीवन हमेशा के लिए छोड़ दिया. कोर्ट सजा सुनाई जिसे माधौ सिंह मुंगावली की खुली जेल में काटा और सजा पूरी करके बाहर आए।
लोगों के मन से अपनी नफरत खत्म की
Dacoit Madho Singh: जेल से बाहर आने के बाद माधौ सिंह जादगर बन गए, लोगों को हाथ के सफाई का जादू दिखाने का खेल दिखाते थे। इसके बाद जीवन में किए कर्मों का पश्चाताप करते हुए जो लोग डाकुओं के हाथों शिकार हुए थे उनके परिवारों मुआवजा दिलाने में मदद शुरू की। इसके बाद गांव के लोगों के मन से माधौ सिंह के लिए नफरत खत्म हुई. 10 अगस्त 1991 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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