सामरसा गांव पुजारी के गले मे प्रकट हुआ नाग
sheopur: तेजा दशमी पर शुक्रवार को जिलेभर में तेजाजी के स्थानों पर मेले लगें इस क्रम में राजस्थान की सीमा पर सटे श्योपुर के सामरसा गांव में लगने वाला तेजाजी का मेला ऐसे-ऐसे रहस्यों से भरा है जिसे देख श्रधालु भी चकित रह जाते हैं।
सामरसा गांव में आस्था का सैलाब
सामरसा गांव के काली माता मंदिर के पुजारी के गले में चंबल नदी की बीच धार में काला नाग आ जाता है। ऐसा एक दो बार नहीं हुआ बल्कि 50 साल से लोग यह नजारा देखते आ रहे हैं। यह सांप पांच से छह घंटे तक काली माता मंदिर पर रहता है। इस दिन यहां सांप-बिच्छू व अन्य विषैले कीटों का शिकार हुए लोगों का इलाज होता है।
पुजारी के गले में हुआ नाग प्रकट
50 साल पहले काली माता मंदिर के पुजारी कृष्णा महाराज के समय ये यह मेला शुरू हुआ था। कृष्णा महाराज चंबल नदी में जाते और उनके गले में काला सांप आ जाता। कृष्णा महाराज के बाद करीब 40 साल तक चतुरी कीर महाराज व राधाकृष्ण कीर महाराज ने यह क्रम जारी रखा। वर्तमान में इस मंदिर के भगत काडूराम मीणा है जो 10 साल से तेजाजी मेले पर इसी तरह नदी से गले में सांप लाकर बीमारों का इलाज कर रहे हैं। इस मेले में हजारों की भीड़ में श्रद्धालु उपस्थित हुए ।
मंदिर के आस-पास घड़ियालों का डेरा
हालांकि जिस वक्त भगत चंबल नदी में डुबकी लगाने जाते हैं उसे वक्त नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ की उपस्थिति रहते हैं लेकिन भगत की शक्ति के कारण ना मगर और ना घड़ियाल भगत के आसपास आ पाते हैं ।
sheopur: नजारा देख हैरान रह गए भक्त
चम्बल नदी के तट पर तेजाजी के मेले में जैसे ही भगत काडूराम मीणा चंबल नदी में गए तो की में ही कालूराम भगत के गले में काला नाग प्रकट हो गया इस दृश्य को देखकर श्रद्धालु भी अचंभित रह गए और कंकाली मैया के जयकारे के नारे से गूंज उठा सामरसा का काली मां का मंदिर ।पुजारी के गले मे प्रकट हुआ नाग ।
