
राधाकृष्णन का कार्यकाल 11 सितंबर 2030 तक चलेगा। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई मुख्यमंत्रियों ने शिरकत की। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और एम वेंकैया नायडू भी उपस्थित रहे। खास बात यह रही कि इस्तीफा देने के 53 दिन बाद पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था।
एक दिन पहले दिया इस्तीफा
9 सितंबर को हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। 152 वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वाले राधाकृष्णन को उम्मीद से 14 वोट ज्यादा मिले। एक दिन पहले ही उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था। यह जीत न केवल भाजपा की एकजुटता का प्रमाण है, बल्कि राधाकृष्णन के लंबे राजनीतिक सफर का भी। तमिलनाडु के तिरुपुर में एक साधारण परिवार में जन्मे इस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से अपनी यात्रा शुरू की और आज देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर पहुंच गए। इस लेख में हम उनके जन्म से लेकर राजनीतिक करियर तक के सफर को विस्तार से जानेंगे।

तिरुपुर की मिट्टी से निकला संघ का स्वयंसेवक
चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में हुआ। । वे एक कोंगु वेल्लाला गाउंडर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो तमिलनाडु के पश्चिमी हिस्से में सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली ओबीसी समुदाय है। उनके पिता सीके पोन्नुसामी एक किसान थे, जबकि मां का नाम के. पार्वती था। तिरुपुर, जो कपड़ा उद्योग का केंद्र है, राधाकृष्णन के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। बचपन से ही वे कृषि और व्यापार से जुड़े रहे, जो बाद में उनके राजनीतिक जीवन में सहायक सिद्ध हुआ।
राधाकृष्णन का परिवार सादगी और कड़ी मेहनत का प्रतीक था। वे तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। बचपन में वे खेलकूद में सक्रिय रहे, विशेषकर टेबल टेनिस, क्रिकेट और वॉलीबॉल में। तिरुपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक माहौल ने उनके व्यक्तित्व को निखारा, जहां वे हिंदू परंपराओं और सामाजिक सेवा की भावना से परिचित हुए।
CP Radhakrishnan: 16 की उम्र में संघ से जुड़े
राधाकृष्णन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तिरुपुर के स्थानीय स्कूलों से प्राप्त की। उन्होंने बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) की डिग्री वीओ चिदंबरम कॉलेज, तूथुकुदी से हासिल की। शिक्षा के दौरान वे व्यापार और अर्थव्यवस्था में रुचि रखते थे, जो बाद में उनके उद्यमी जीवन में झलका। लेकिन राजनीति की ओर उनका झुकाव किशोरावस्था में ही हो गया। 16 वर्ष की आयु में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े, जो उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

आरएसएस की शाखाओं में भाग लेते हुए उन्होंने अनुशासन, राष्ट्रवाद और सेवा भाव सीखा। 1974 में वे भारतीय जनसंघ (जो बाद में भाजपा बना) की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने। यह वह दौर था जब इमरजेंसी लगी हुई थी, और युवा राधाकृष्णन ने भूमिगत गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। शिक्षा पूरी करने के बाद वे कुछ समय के लिए व्यवसाय में लगे, विशेषकर 100% कॉटन निटेड फैब्रिक के निर्यात में। 1985 से 1998 तक उन्होंने बांग्लादेश, यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के देशों के साथ व्यापारिक संबंध विकसित किए। लेकिन राजनीति ही उनकी असली पुकार थी।

वैवाहिक और पारिवारिक जीवन
CP Radhakrishnan: 25 नवंबर 1985 को राधाकृष्णन का विवाह आर कमला से हुआ। दंपति के दो पुत्र हैं। वे सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं, धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सक्रिय। व्यापक यात्राओं के बावजूद वे तिरुपुर से जुड़े रहे।

RSS से संसद तक की यात्रा
राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में शुरू हुआ। 1970 के दशक में वे जनसंघ के सक्रिय सदस्य बने। इमरजेंसी के दौरान उनकी भूमिका सराहनीय रही, जिसने उन्हें पार्टी में पहचान दिलाई। 1996 में वे तमिलनाडु भाजपा के महासचिव बने। तमिलनाडु में भाजपा की जड़ें कमजोर होने के बावजूद राधाकृष्णन ने संगठनात्मक कार्यों से पार्टी को मजबूत किया। वे “तमिलनाडु के मोदी” के नाम से मशहूर हुए, क्योंकि उनकी मेहनत और राष्ट्रवादी विचारधारा पीएम मोदी से मिलती-जुलती थी।
1998 कोइम्बेटूर बम विस्फोट के बाद हुए लोकसभा चुनाव में राधाकृष्णन ने डीएमके के एम रामनाथन को हराकर कोइम्बेटूर से सांसद चुने गए। यह भाजपा के लिए तमिलनाडु में ऐतिहासिक जीत थी, जहां एआईएडीएमके गठबंधन के तहत तीन सीटें जीती गईं। 1999 में वे दोबारा सांसद चुने गए। संसद में वे वाणिज्य समिति, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम समिति और वित्त परामर्शी समिति के सदस्य रहे। उन्होंने स्टॉक मार्केट घोटाले की जांच समिति में भी योगदान दिया। 2004 में वे संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने।
CP Radhakrishnan: रथ यात्रा और विवाद
2004 से 2007 तक राधाकृष्णन तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने 93 दिनों की 19,000 किलोमीटर लंबी रथ यात्रा निकाली। यात्रा का उद्देश्य नदियों को जोड़ना, आतंकवाद उन्मूलन, समान नागरिक संहिता लागू करना, अस्पृश्यता हटाना और नशीली दवाओं के खिलाफ जागरूकता फैलाना था। डीएमके ने इसकी आलोचना की, लेकिन इससे भाजपा का आधार मजबूत हुआ।
2012 में मेट्टुपालयम में आरएसएस कार्यकर्ता पर हमले के विरोध में प्रदर्शन के दौरान उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया गया। यह घटना उनके संघ के प्रति समर्पण को दर्शाती है। 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी कैबिनेट और 2014 में मोदी सरकार में उन्हें मंत्री पद के लिए विचार किया गया, लेकिन नाम भ्रम के कारण अवसर हाथ से निकल गया।
कोयर बोर्ड से राज्यपाल तक
राजनीति के अलावा राधाकृष्णन ने प्रशासनिक क्षेत्र में भी योगदान दिया। 2016 से 2020 तक वे कोच्चि स्थित कोयर बोर्ड के अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में कोयर निर्यात रिकॉर्ड 2,532 करोड़ रुपये तक पहुंचा। 2020 से 2022 तक वे भाजपा के केरल प्रभारी रहे, जहां पार्टी संगठन को मजबूत करने में सफल रहे।
फरवरी 2023 में पीएम मोदी ने उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया। चार महीनों में उन्होंने 24 जिलों का दौरा किया, स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। जुलाई 2024 में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल बने, साथ ही तेलंगाना के राज्यपाल और पुदुच्चेरी के उपराज्यपाल भी। इन भूमिकाओं में उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की। जुलाई 2025 में झारखंड, तेलंगाना और पुदुच्चेरी के पद छोड़े। 11 सितंबर 2025 को महाराष्ट्र राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर वे उपराष्ट्रपति पद के लिए रवाना हुए।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025
जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद रिक्त हो गया। विपक्ष ने गहरे कारणों का आरोप लगाया, लेकिन अमित शाह ने इसे खारिज किया। 17 अगस्त 2025 को जेपी नड्डा ने राधाकृष्णन को एनडीए उम्मीदवार घोषित किया। एआईएडीएमके, जेडीयू, एनसीपी, टीडीपी और वाईएसआरसीपी जैसे दलों का समर्थन मिला।

राधाकृष्णन को 452 वोट मिले
CP Radhakrishnan: 9 सितंबर को संसद में गुप्त मतदान हुआ। 781 सदस्यों वाले निर्वाचक मंडल में 767 ने वोट डाले, 15 अमान्य। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300। 152 वोटों की जीत अपेक्षा से अधिक थी, जो क्रॉस वोटिंग का संकेत देती है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी: “उनका जीवन समाज सेवा और गरीबों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित रहा है।” पूर्व वीपी धनखड़ ने पत्र लिखकर शुभकामनाएं दीं।
