bhopal- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (Barkatullah University Bhopal) के दीक्षांत समारोह (BU Convocation Ceremony) के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बयान ने एक नई विवाद की स्थिति उत्पन्न कर दी है। इस समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया, और बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
मंत्री परमार का संबोधन
मंत्री परमार ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “अमेरिका की खोज हमारे पूर्वजों ने की थी, न कि क्रिस्टोफर कोलंबस ने।” उन्होंने यह भी दावा किया कि वास्को डी गामा ने भारत का कोई रास्ता नहीं खोजा था और भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उनके अनुसार, माया संस्कृति के विकास में भारतीय योगदान था और यह भारत का प्राचीन चिंतन और दर्शन है, जिसे शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए।
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इसको लेकर विशेष ध्यान दिया गया
मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थी भारतीय संस्कृति के अनुरूप संस्कारों का निर्वहन करते हुए जीवन पथ पर अग्रसर हों और देश के परिवेश को सकारात्मक बनाए रखने में हर संभव योगदान दें। नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष ध्यान दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से हमें यह अवसर मिल रहा है कि हम देश की परंपरा, भारत के ज्ञान, दर्शन और सभ्यता की उन विशेषताओं पर काम कर सकें, जिनके आधार पर भारत को “विश्वगुरु” कहा जाता था।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बयान
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह छात्रों को जीवन की एक नई यात्रा की शुरुआत के लिए प्रेरित करता है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान किए, जो इस मौके की विशेषता रही।
यह बयान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को पुनः परिभाषित करता है, बल्कि भारतीय शिक्षा और ज्ञान परंपरा को एक नई दिशा देने का भी प्रयास करता है। हालांकि, यह बयान विवादों को जन्म दे सकता है, क्योंकि ऐतिहासिक तथ्यों पर इस प्रकार के दावे अकादमिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
