Contraceptive pills link with cancer: गर्भनिरोधक गोलियों को लेकर अक्सर एक बड़ा सवाल उठता है, क्या इनसे कैंसर हो सकता है? अनेक महिलाओं तथा लड़कियों के मन में यह डर बना रहता है, लेकिन मेडिकल रिसर्च इस विषय पर क्या कहती है, यह जानना बेहद आवश्यक है। आइए समझते हैं कि प्रेग्नेंसी रोकने वाली दवाइयों का कैंसर से क्या संबंध है और कितनी सच है यह धारणा।

क्या होती हैं गर्भनिरोधक गोलियां?
गर्भनिरोधक गोलियां, जिन्हें अंग्रेजी में कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स कहा जाता है, मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
- कंबाइंड पिल: इसमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोजन दोनों हॉर्मोन होते हैं
- मिनी पिल: इसमें केवल प्रोजेस्टोजन हॉर्मोन होता है
ये गोलियां शरीर के हार्मोनल संतुलन को बदलकर गर्भधारण को रोकने का काम करती हैं।
क्या इनसे कैंसर का खतरा बढ़ता है?
रिसर्च के अनुसार, कंबाइंड पिल लेने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन यह जोखिम स्थायी नहीं होता। जैसे ही कोई महिला इन गोलियों का सेवन बंद करती है, लगभग 10 साल के भीतर यह खतरा ख़त्म हो जाता है। इसके अलावा, लंबे समय तक कंबाइंड पिल लेने से सर्वाइकल कैंसर का जोखिम भी कुछ हद तक बढ़ सकता है, पर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस पर अभी और शोध की जरूरत है।
कुछ कैंसर से बचाव भी करती हैं ये गोलियां
दिलचस्प बात यह है कि यही गर्भनिरोधक गोलियां कुछ प्रकार के कैंसर से बचाव भी करती हैं। रिसर्च बताती है कि इनसे ओवेरियन (अंडाशय) और एंडोमेट्रियल (गर्भाशय) कैंसर का खतरा कम हो सकता है। यह फायदा पिल बंद करने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है।

Contraceptive pills link with cancer: मिनी पिल को लेकर क्या कहती है स्टडी?
गौरतलब है कि मिनी पिल पर अब तक सीमित रिसर्च हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इससे भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन यह जोखिम धीरे-धीरे कम हो जाता है। अन्य कैंसर पर इसके प्रभाव को लेकर अभी स्पष्ट निष्कर्ष प्राप्त नहीं हुआ है।
क्या महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियां लेनी चाहिए?
यह फैसला हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग सिद्ध हो सकता है। डॉक्टर अक्सर पेशेंट की सेहत, उम्र और जोखिम को ध्यान में रखते हुए सही सलाह देते हैं। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि कैंसर का खतरा केवल पिल्स से नहीं, बल्कि धूम्रपान, मोटापा और शराब के सेवन जैसे अन्य कारकों से भी पनपता है।
