टिकट की लड़ाई और उम्मीदों की झड़क
congress first 48 candidates list: राजनीति में टिकट जैसे एक छोटा टोकन नहीं, बल्कि आशा, पहचान और जंग की शुरुआत होती है। जब कांग्रेस ने अपनी पहली सूची में 48 नाम जारी किए हैं, तो न केवल प्रत्याशियों की फ़ेहरिस्त सामने आई है, बल्कि समाज के बदलाव की हसरतों की झलक भी।

कांग्रेस ने कुटुंबा से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, और कदवा से वरिष्ठ नेता शकील अहमद को मैदान में उतारा है। इसके अलावा पार्टी ने पाँच महिलाओं को टिकट दिया है, जिनमें से चार मुस्लिम उम्मीदवार भी हैं यह संकेत है कि पार्टी इस बार सामाजिक समावेशिता को खुलकर सामने रख रही है।
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congress first 48 candidates list: कांग्रेस की इस सूची के मायने
congress first 48 candidates list: महिलाओं का पैनल
- सरिता देवी (सोनबरसा)
- अमिता भूषण (बेगूसराय)
- नीतु कुमारी (हसुआ)
- पूनम पासवान (कोड़ा)
- प्रतिमा कुमारी (राजापाकर)
इन नामों के पीछे है एक संघर्ष, समाज में महिलाओं की आवाज़ और उनकी जमीन बनावने की कोशिश।
congress first 48 candidates list: मुस्लिम चेहरे
- इन 5 महिलाओं में से 4 मुस्लिम उम्मीदवार हैं यह एक बड़ा राजनीतिक संकेत है।
- शकील अहमद जैसे अनुभवी नेता भी पार्टी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
टिकट विवाद और विरोध
सूची जारी होने से पहले पटना एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं के साथ झड़प भी हुई। डॉ. अशोक आनंद सहित कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि टिकट 5 करोड़ रुपये में बेचे गए। ऐसी बातें राजनीति में हवा भर देती हैं टिकट सिर्फ नाम नहीं, कौफील जगह, भरोसा और सत्ता होती है।
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congress first 48 candidates list: क्यों यह सूची ज़रूरी है?
- सामाजिक समीकरण: महिलाओं और मुस्लिम नेताओं को शामिल करके कांग्रेस ने संदेश दिया है कि वह विभिन्न समुदायों को साथ लेकर चुनावी युद्ध लड़ना चाहती है।
- बदलाव की कोशिश: यह सूची उन पुराने विचारों को चुनौती देती है, जो राजनीति को सिर्फ जाति, धन और रसूख तक सीमित मानते हैं।
- जोखिम और भरोसा: नए चेहरे पर भरोसा करना आसान नहीं यह दावा है कि जिन उम्मीदवारों को टिकट मिला है, वे जनता में दम दिखा सकते हैं।
- विरोधाभास और सवाल: सूची जारी होने से पहले विवाद झुलसा देता है कि राजनीति में पारदर्शिता और भरोसा अभी भी खोखले शब्द हैं।
