देश की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त हलचल मच गई जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक AI जनरेटेड वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दिया । महज 43 सेकेंड का यह वीडियो देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया ।
कांग्रेस ने वीडियो के साथ जो लाइन लिखी. उसने आग में घी डालने का काम किया । कैप्शन में कहा गया कि प्रधानमंत्री के डर का खामियाजा आज पूरा देश भुगत रहा है । इस एक वाक्य ने वीडियो को सिर्फ व्यंग्य तक सीमित नहीं रहने दिया. बल्कि इसे सीधा राजनीतिक हमला बना दिया ।
वीडियो में दिखाया गया संवाद काल्पनिक है. लेकिन उसका असर असली राजनीति पर पड़ता दिखा । AI तकनीक से तैयार इस क्लिप में प्रधानमंत्री मोदी और ट्रम्प को फोन पर बात करते हुए दिखाया गया है । शुरुआत में मोदी. ट्रम्प को कॉल लगाते हैं और हालचाल पूछते हैं । जवाब में ट्रम्प नाराजगी जताते हैं ।
इसके बाद वीडियो में मोदी कहते नजर आते हैं कि उन्होंने वही किया जो ट्रम्प ने कहा । सीजफायर करवाया. रूस से तेल खरीद कम की और हर निर्देश माना । ट्रम्प की आवाज में धमकी भी सुनाई देती है कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई. तो टैरिफ बढ़ा दिए जाएंगे ।
वीडियो का सबसे विवादित हिस्सा तब आता है. जब मोदी कथित तौर पर कहते हैं कि वे जनता पर बोझ डालने को भी तैयार हैं. बस ट्रम्प खुश रहें । इसी सीन में मोदी घबराकर कुर्सी से उठते दिखते हैं । यही दृश्य कांग्रेस का मुख्य संदेश बन गया ।
कांग्रेस नेताओं ने इस वीडियो को भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाने का जरिया बताया । पार्टी का कहना है कि देश की अंतरराष्ट्रीय साख किसी एक नेता की छवि या डर से तय नहीं होनी चाहिए । कुछ नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि अगर ऐसे हालात हैं. तो क्या अगला कदम प्रधानमंत्री को धमकाना या किडनैप करना होगा ।
हालांकि कांग्रेस ने यह भी साफ किया कि वीडियो AI से बनाया गया है और इसे प्रतीकात्मक व्यंग्य के रूप में देखा जाना चाहिए । पार्टी का तर्क है कि यह सरकार के फैसलों और अमेरिका के प्रति झुकाव पर सवाल उठाने का एक तरीका है ।
दूसरी ओर बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया । पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह के वीडियो जनता को गुमराह करने की कोशिश हैं और भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचाते हैं । बीजेपी के मुताबिक AI का इस्तेमाल कर झूठा नैरेटिव गढ़ना खतरनाक चलन बनता जा रहा है ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं है । यह आने वाले समय में AI और राजनीति के रिश्ते पर बड़ी बहस छेड़ सकता है । सवाल यह भी उठ रहा है कि चुनावी माहौल में ऐसी तकनीक को कहां तक सही माना जाए ।
