Colonel Sonaram Choudhary Death : दिल्ली के अपोलो अस्पताल में ली अंतिम सांस
राजस्थान के बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र के प्रख्यात जाट नेता और पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी का दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हो गया। 85 वर्षीय कर्नल सोनाराम को बुधवार शाम सीने में अचानक दर्द उठा, जिसके बाद उन्हें अपोलो अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन रात करीब 11:15 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। ऑपरेशन के बाद स्थिति सामान्य बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट भी उन्होंने खुद की थी, लेकिन थोड़ी ही देर में यह दुखद समाचार सामने आया.
सेना से राजनीति तक का सफर
जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ में जन्मे कर्नल सोनाराम ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी करने के बाद जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई किया। 1966 में वे भारतीय सेना में अफसर बन गए। 1971 के भारत-पाक युद्ध में पूर्वी मोर्चे पर उन्होंने अहम भूमिका निभाई। सेना में 25 साल की सेवा के बाद 1994 में कर्नल के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर सार्वजनिक सेवा का मन बनाया.
Colonel Sonaram Choudhary Death : राजनीतिक यात्रा और उपलब्धियां
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कर्नल सोनाराम ने कांग्रेस के टिकट पर 1996, 1998 और 1999 में बाड़मेर-जैसलमेर से लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीते। 2004 के संसदीय चुनाव में वे हार गए, लेकिन 2008 में बायतु से विधायक बने। राजनीतिक हालात बदलते देख 2014 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा और इसी साल चौथी बार लोकसभा पहुंचे। हालांकि 2019 में टिकट ना मिलने के बाद वह वापस कांग्रेस में लौट आए। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी वे कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे.
अंतिम यात्रा एवं श्रद्धांजलि
उनकी पार्थिव देह को दिल्ली से जैसलमेर के उतरलाई एयरबेस लाया जाएगा। फिर बाड़मेर स्थित उनके घर पर दर्शन के लिए रखा जाएगा और उसके बाद पैतृक गांव मोहनगढ़ में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से पूरी मारवाड़ क्षेत्र में शोक की लहर है और राजस्थान की राजनीति में एक खालीपन पैदा हो गया है। कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों, विधायक, सांसदों ने गहरा दुख प्रकट किया है.
कर्नल सोनाराम चौधरी का जीवन सेना से लेकर राजनीति तक जन-सेवा को समर्पित रहा। वे किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्र की मजबूत आवाज माने जाते थे। उनका जाना न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक अपूरणीय क्षति है.
