Cold syrups commission scandal :मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप से जुड़ा मामला तब सामने आया, जब बच्चों की मौत की खबरें आने लगीं। जांच में पाया गया कि सिरप प्रिस्क्राइब करने वाले डॉक्टरों को दवा कंपनी से 10% कमीशन दिया जा रहा था। डॉक्टर प्रवीण सोनी ने इसका कोर्ट के सामने बयान को स्वीकार किया है
कमीशन के लिए जानलेवा दवा
डॉ. सोनी और अन्य डॉक्टरों ने कंपनी की ओर से कमीशन मिलने के बावजूद केंद्र सरकार की गाइडलाइन की अनदेखी की जिसमें 4 साल से कम उम्र के बच्चों को FDC दवाएं न देने का निर्देश था। कंपनी के साथ साठगांठ के चलते डॉक्टरों ने ऐसी दवाएं बार-बार लिखीं, जिससे कई बच्चों की मौत हो गई।
डॉक्टर की जमानत नामंजूर
कोर्ट ने डॉ. सोनी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि डॉक्टर ने जानबूझकर मिलावटी सिरप बच्चों को दी, जबकि दवा के खतरे की जानकारी थी। कोर्ट ने मेडिकल नैतिकता के उल्लंघन की बात मानी और मामले की गंभीरता के चलते जमानत देने से इनकार कर दिया।
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4 साल से कम बच्चों को दिया FDC
कोर्ट ने कहा कि सीनियर डॉक्टर होने के बावजूद डॉ. सोनी ने भारत सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया. गाइडलाइन में 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को फिक्स डोज कॉम्बिनेशन (FDC) नहीं दिए जाने का निर्देश दिया गया था.
गिरफ्तारियां और जांच
श्रीसन फार्मा के केमिकल एनालिस्ट समेत तीन और लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैइ श्रीसन फार्मास्यूटिकल कंपनी का लाइसेंस राज्य सरकार ने कैंसल कर दिया है, और प्लांट भी बंद हो गया है। पुलिस ने मेडिकल स्टोर्स और डॉक्टर्स के नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जिसमें स्टॉकिस्ट और मेडिकल संचालकों की भी गिरफ्तारी की गई।
प्रशासनिक निर्देश
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के निर्देश को भी डॉक्टरों ने नजरअंदाज किया। निर्देश के बावजूद बच्चों को जानलेवा दवा दी गई, जिससे किडनी फेल्योर और मौतें हुईं। पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 से अधिक बच्चों की मौत इसी कारण हुई
