
पशुपालन विभाग का नाम बदला
सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए पशुपालन विभाग का नाम बदलकर गोपालन विभाग करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह बदलाव गौ-संरक्षण और गौपालन को विशेष महत्व देने के लिए किया गया है। सीएम ने बताया कि वर्ष 2003 में पशुपालन विभाग का बजट मात्र 300 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 2600 करोड़ रुपये हो गया है। यह वृद्धि सरकार के गौ-संरक्षण और पशुपालन के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का परिणाम है। इस कदम से गौशालाओं को और अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे गौपालन को नया आयाम मिलेगा।
मध्यप्रदेश के पशुपालन विभाग को अब गौपालन विभाग के नाम से भी जाना जाएगा… pic.twitter.com/ll4VnSOw4S
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 20, 2025
CM Mohan Cow Shelter Conference: गाय के दूध को सम्मान
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व में गाय के दूध की खरीद को लेकर कई तरह के प्रतिबंध और अड़चनें लगाई गई थीं। वर्तमान सरकार ने इस स्थिति को बदलने का निर्णय लिया है। सीएम ने कहा कि अब गाय का दूध सम्मान के साथ खरीदा जाएगा। इसके अलावा, गौशालाओं को केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि गौशालाएं गोबर से सीएनजी और अन्य उत्पादों जैसे दवाइयों का उत्पादन भी कर सकती हैं। यह न केवल गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देगा।
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गौ-संरक्षण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
इस सम्मेलन ने गौ-संरक्षण के प्रति मध्य प्रदेश सरकार की गंभीरता को उजागर किया। सीएम मोहन यादव ने गौपालकों और गौशाला संचालकों को आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी। 90 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर के साथ-साथ, सरकार गौशालाओं के लिए नई योजनाएं और तकनीकी सहायता प्रदान करने की दिशा में भी काम कर रही है। इस अवसर पर गौपालकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और गौ-संरक्षण के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की।
