CM Dr. Mohan Yadav: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध एवं एक सिनेरियस गिद्ध शामिल हैं, जो पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जटाशंकर (जटायु) का गहरा संबंध रामायण काल से बताया है। उन्होंने रामायण की सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए ऐसे पवित्र स्थलों के संरक्षण और महत्व पर जोर दिया है।

राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है-मुख्यमंत्री
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश जहां बाघ और तेंदुओं की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है, वहीं गिद्ध संरक्षण में भी देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक संख्या में गिद्ध पाए जाते हैं, जिनमें प्रवासी प्रजातियां भी शामिल हैं।
CM Dr. Mohan Yadav: “गिद्ध परिदृश्य” को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
बताया गया कि इन पांचों गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया। इन्हें उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटर से टैग किया गया है। जानकारी के अनुसार सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाई-वे के तहत 30 से अधिक देशों तक लंबी दूरी का प्रवास करते हैं। यह पहल मध्य भारत के विकसित होते “गिद्ध परिदृश्य” को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
CM Dr. Mohan Yadav: वन विभाग ने WWF-India और Bombay Natural History Society के सहयोग से उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम शुरू किया है। इससे गिद्धों की गतिविधियों, आवागमन, भोजन क्षेत्रों और जोखिम वाले इलाकों की सटीक पहचान की जा सकेगी। रामायण में जटायु और सम्पाती की कथा गिद्धों के साहस और त्याग का प्रतीक मानी जाती है।
