सीएम धामी बोले – “आपके साहस से देश की सीमाएं सुरक्षित”
cm dhami meets ssb jawans banbasa : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बनबसा स्थित भारत-नेपाल सीमा पर जाकर एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों और अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने न केवल जवानों का हौसला बढ़ाया, बल्कि सीमा सुरक्षा और विकास कार्यों का भी निरीक्षण किया।
📍 बनबसा SSB चौकी पर सुरक्षा और समर्पण का सम्मान
सीएम धामी ने शाम को बनबसा पहुंचकर एसएसबी बॉर्डर पोस्ट का दौरा किया। उन्होंने जवानों से बातचीत की और उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा:
“देश की सीमाएं इसलिए महफूज़ हैं क्योंकि हमारे जवान दिन-रात कड़ी मेहनत और समर्पण से डटे रहते हैं।”
cm dhami meets ssb jawans banbasa : जवानों से संवाद, अधिकारियों से समीक्षा
- जवानों के साथ हुई बातचीत में सीएम धामी ने उनके दैनिक कार्य, सीमा पर चुनौतियों, और सामाजिक योगदान के बारे में जानकारी ली।
- उन्होंने सीमा चौकियों की सुविधाओं, संसाधनों, और जरूरी सुधारों पर भी अधिकारियों से फीडबैक लिया।
- एसएसबी द्वारा स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सहभागिता के कार्यों की भी मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की।
🛣 4-लेन रोड प्रोजेक्ट का भी लिया जायजा
सीएम धामी ने बनबसा से नेपाल तक बन रही 4 किलोमीटर लंबी फोर लेन सड़क के निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। यह सड़क भारत-नेपाल के बीच संपर्क को मजबूत बनाएगी और व्यापारिक गतिविधियों को गति देगी।
🧑🌾 ग्रामीणों से मुलाकात, समस्याएं सुनीं
बनबसा भ्रमण के दौरान सीएम धामी ने रास्ते में ग्रामीणों से भी मुलाकात की। उन्होंने लोगों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए।
“राज्य सरकार हर नागरिक तक पहुँचने और हर समस्या को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है,” – सीएम धामी
🎖 SSB जवानों के लिए मुख्यमंत्री के विशेष संदेश
- अदम्य साहस की सराहना
- सीमाओं की सुरक्षा में योगदान को राष्ट्रीय कर्तव्य बताया
- भारत-नेपाल सीमा की सतत निगरानी के लिए SSB की प्रतिबद्धता की सराहना
📸 प्रमुख गतिविधियां
✅ SSB जवानों के साथ संवाद
✅ भारत-नेपाल सीमा चौकी का निरीक्षण
✅ अधिकारियों के साथ बैठक
✅ 4-लेन सड़क निर्माण का जायजा
✅ ग्रामीण जनता से मुलाकात
✅ समस्याओं का त्वरित संज्ञान
🧭 सरकार लोगों के साथ खड़ी है
सीएम पुष्कर सिंह धामी का बनबसा दौरा केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक मजबूत संदेश था – “हमारे सीमांत क्षेत्रों और वहां तैनात जवानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उनकी उपस्थिति ने न सिर्फ SSB के मनोबल को बढ़ाया, बल्कि आम लोगों को भी यह भरोसा दिया कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
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