Revenue Lok Adalat Uttarakhand: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में ‘राजस्व लोक अदालत’ का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाते हुए आम जनमानस को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

‘सबका साथ, सबका विकास’
CM धामी ने कहा कि यह पहल न्याय सुलभता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। राज्य सरकार का यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से दिए गए ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र की भावना का विस्तार है।
राजस्व लोक अदालत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सदैव इस बात पर बल दिया गया है कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरलता और शीघ्रता से पहुंचे। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राजस्व लोक अदालत का आयोजन सालों से लंबित राजस्व विवादों के त्वरित और सार्थक समाधान के लिए किया गया है।

राजस्व विवादों का निस्तारण
उन्होंने कहा कि राजस्व संबंधी विवाद केवल कागजी प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि इनके पीछे किसानों की भूमि, परिवारों की आजीविका और व्यक्तियों का आत्मसम्मान जुड़ा होता है। राज्य में राजस्व विवादों के निस्तारण के लिए राज्य स्तर पर राजस्व परिषद, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त न्यायालय, जिला स्तर पर कलेक्टर न्यायालय और तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार न्यायालय कार्यरत हैं।
Revenue Lok Adalat Uttarakhand: ‘न्याय आपके द्वार’
वर्तमान में राज्य में 400 से ज्यादा राजस्व न्यायालय संचालित हैं, जिनमें लगभग 50 हजार से ज्यादा प्रकरण लंबित हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र के साथ ‘राजस्व लोक अदालत’ की अभिनव पहल प्रारंभ की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘न्याय आपके द्वार’ की अवधारणा को साकार करते हुए राज्य के सभी 13 जनपदों में 210 स्थानों पर एक साथ राजस्व लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 6,933 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।
