वो सुबह… जब नींद खुली नहीं
रविवार सुबह की वो नींद अब भी आंखों से नहीं गई। लेकिन कुछ लोगों के लिए तो वो नींद ही आखिरी बन गई।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में जब लोग सुबह की चाय की तैयारी कर रहे थे, तब आसमान ने ऐसा कहर बरपाया कि कई घर तबाह हो गए, ज़िंदगियां मलबे में दफन हो गईं। यह सिर्फ मौसम की खबर नहीं है। यह उन लोगों की कहानी है जो सबकुछ खो बैठे घर, सामान, और कुछ ने तो अपनों को भी।
कठुआ की कहानी: जब गांव बना वीराना
कठुआ, जम्मू का वो इलाका जो आमतौर पर शांति और सीमावर्ती सादगी के लिए जाना जाता है। लेकिन 17 अगस्त की सुबह वहां की ज़मीन कांप गई।
जोद घाटी, एक छोटा सा गांव जहां नदियां गुनगुनाया करती थीं वहां अब सन्नाटा है। बादल फटने के बाद आई लैंडस्लाइड में 7 लोगों की मौत हो गई, कई घायल हैं। मथरे चक, बगार्ड-चंगड़ा, और दिलवान-हुटली ये नाम अब सिर्फ नक्शों में रह गए हैं, वहां की गलियों में अब कीचड़ है और दीवारों पर दरारें।
एक महिला जो अपने घर में चाय बना रही थी, अचानक कमर तक मलबे में फंस गई। पड़ोसी उसे खींच कर बाहर लाए। क्या आप सोच सकते हैं? सुबह-सुबह घर में पानी नहीं, बल्कि पत्थरों का तूफान घुस जाए?

डिप्टी एसपी राजेश शर्मा की माने तो 2-3 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 6 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। नेशनल हाईवे पर कई जगह नुकसान हुआ है, रेलवे ट्रैक भी नहीं बच सका।
कुल्लू की चीख: पानी आया… भागो!
इधर हिमाचल के कुल्लू जिले में सुबह करीब 4 बजे का वक्त था। टकोली, पनारसा, नगवाई यह इलाक़े नींद में डूबे थे, तभी बादल फटा। एक तेज़ आवाज़, और फिर कुछ सेकंड्स में पूरी बस्ती पानी और मलबे में समा गई।
एक लोकल निवासी ने रोते हुए बताया, “हमने बस इतना सुना ‘भागो!’ और हम जो पहन पाए, उसमें ही घर से निकल भागे।”
एफकॉन कंपनी की कॉलोनी, शालानाल खड्ड, और कई छोटे गांव तबाह हो गए। 10 से ज्यादा घरों में मलबा भर गया। मनाली-चंडीगढ़ फोरलेन बंद हो चुकी है। मंडी और कुल्लू के कई हिस्सों में जनजीवन थमा हुआ है।
खतरा अभी टला नहीं है
मौसम विभाग ने साफ चेतावनी दी है 17 से 19 अगस्त तक जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भारी बारिश की संभावना है। 11 जिलों में लैंडस्लाइड और बादल फटने का खतरा मंडरा रहा है। हिमाचल में इस मानसून सीजन में अब तक 261 लोगों की जान जा चुकी है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये वो कहानियां हैं जो अब अधूरी रह गईं।

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