china usa trade deal final : जिनेवा में ऐतिहासिक समझौता, ट्रंप बोले- ये फाइनल डील है
china usa trade deal final : जिनेवा में दो दिन चली कड़ी बातचीत के बाद अमेरिका और चीन ने आखिरकार उस व्यापार युद्ध पर ब्रेक लगा दिया है, जिसने दो सालों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला रखा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील को “अंतिम” करार देते हुए कहा है कि अब दोनों देश अपने व्यापारिक रिश्तों को एक नई शुरुआत देंगे।
🤝 दो दिन की मैराथन बातचीत में बनी सहमति
स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा शहर में हुई दो दिवसीय बातचीत के बाद दोनों देशों ने व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें अमेरिका की ओर से व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर और चीन की ओर से उपप्रधानमंत्री हे यीवेन और वाणिज्य उपमंत्री ली चेंगगांग शामिल हुए।
हे यीवेन ने कहा कि “सोमवार को एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा जो न सिर्फ दोनों देशों बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर होगी।”
📉 टैरिफ वॉर का अंत?
हालांकि अमेरिका और चीन ने 145% अमेरिकी टैरिफ और 125% चीनी टैरिफ को तुरंत कम करने की बात नहीं की है, लेकिन ट्रंप ने एनबीसी को दिए इंटरव्यू में यह संकेत जरूर दिया है कि वह टैरिफ दरों को “किसी भी समय” घटा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर ये टैरिफ नहीं घटाए गए, तो दोनों देशों के लिए व्यापार करना असंभव हो जाएगा। चीन की इकॉनमी पहले ही संघर्ष कर रही है, वहां फैक्ट्री आउटपुट 2023 के बाद से सबसे खराब स्तर पर है।
💬 क्या बोले अमेरिकी अधिकारी?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर ने कहा, “हमें उम्मीद से भी जल्दी समझौता हो गया, जिससे साफ है कि मतभेद उतने बड़े नहीं थे जितना पहले सोचा गया था।” दोनों पक्षों ने व्यापार घाटा, बौद्धिक संपदा अधिकार, और फेंटेनाइल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी सहमति जताई।
🔁 कैसे शुरू हुआ था यह ट्रेड वॉर?
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही अमेरिका ने चीन पर लगातार टैरिफ बढ़ाए। फरवरी 2025 में फेंटेनाइल संकट को लेकर ट्रंप ने 20% का शुरुआती टैरिफ लगाया था। इसके बाद अप्रैल में यह दर 34% हुई और धीरे-धीरे यह 145% तक पहुंच गई। जवाब में चीन ने भी अमेरिकी वस्तुओं पर 125% तक टैरिफ लगा दिया, जिससे करीब 600 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लगभग ठप हो गया।
📊 टैरिफ से क्या हुआ नुकसान?
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अमेरिका: महंगाई में बढ़ोतरी, अमेरिकी किसानों को बड़ा झटका
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चीन: फैक्ट्रियों में उत्पादन गिरा, निर्यात ऑर्डर घटे
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दुनिया: वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर असर, बाजारों में अस्थिरता
🔄 अब आगे क्या?
संयुक्त बयान में दोनों देशों के बीच एक नई आर्थिक वार्ता की शुरुआत की घोषणा की जाएगी, जिसका उद्देश्य पुराने मतभेदों को खत्म कर दीर्घकालिक व्यापारिक स्थिरता हासिल करना है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह डील अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं चीन ने इसे “दोनों पक्षों की जीत” बताया है।
🧭 विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह समझौता विश्व व्यापार संगठन (WTO) की भूमिका को भी मजबूत करता है। जिनेवा में हुई यह बातचीत WTO की निगरानी में हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन सुनिश्चित हुआ।
📌 पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी राहत
चीन और अमेरिका के बीच हुआ यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता न सिर्फ इन दो देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी राहत है। इस डील से न सिर्फ व्यापार सामान्य होगा बल्कि वैश्विक बाजारों को भी स्थिरता मिलेगी। हालांकि, टैरिफ में कमी को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन ट्रंप के नरम रुख से उम्मीद की किरण जरूर नजर आ रही है।
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