जापान और ऑस्ट्रेलिया की चुप्पी, ऑस्ट्रेलिया बोला- काल्पनिक सवाल का जवाब नहीं
चीन-ताइवान विवाद को लेकर अमेरिका ने जापान और ऑस्ट्रेलिया से संभावित सैन्य सहयोग पर बातचीत की, लेकिन दोनों देशों ने इस सवाल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने से बचते हुए चुप्पी साध ली। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के रक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी एल्ब्रिज कॉल्बी ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और जापान के रक्षा अधिकारियों से ताइवान को लेकर संभावित संघर्ष पर कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं।
ऑस्ट्रेलिया की स्पष्ट चुप्पी
ऑस्ट्रेलिया ने साफ तौर पर कहा है कि वह अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता कि अगर ताइवान को लेकर युद्ध होता है तो वह अमेरिका के साथ खड़ा होगा या नहीं। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा उद्योग मंत्री पैट कॉनरोय ने इस मुद्दे पर अपने बयान में कहा –
“हम किसी काल्पनिक स्थिति पर सार्वजनिक रूप से बात नहीं करते। ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों को किसी संघर्ष में भेजने का निर्णय उस समय की सरकार ही करेगी।”
यह बयान एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया अमेरिका के साथ अपने सबसे बड़े सैन्य अभ्यास ‘एक्सरसाइज टैलिस्मन सेबर’ में हिस्सा ले रहा है, जिसमें 18 देशों की सेनाएं भाग ले रही हैं।
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जापान की खामोशी और अमेरिकी अधिकारी का बयान
वहीं जापान ने इस सवाल पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। जापान के रवैये को लेकर अमेरिकी अधिकारी एल्ब्रिज कॉल्बी ने कहा कि यूरोप और एशिया में अमेरिका के सहयोगी देश अपनी सेनाओं पर अधिक खर्च कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी नीति में बदलाव आया है।
कोल्बी ने यह भी कहा कि कुछ देशों ने इस चर्चा से बचने की कोशिश की, लेकिन नाटो समिट के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है, और कुछ देशों ने इसे समझा भी है।
ऑस्ट्रेलिया का चीन के साथ व्यापारिक रिश्ता
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज हाल ही में चीन की छह दिन की आधिकारिक यात्रा पर गए हैं। उनका स्पष्ट उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूती देना है। अल्बनीज ने कहा कि ताइवान पर ऑस्ट्रेलिया कोई बयान नहीं देगा, क्योंकि यह उनके दौरे का उद्देश्य नहीं है।

इसके अलावा, अल्बनीज का यह भी कहना था कि उनकी सरकार ने चीन के साथ बिगड़े रिश्तों को सुधारने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चीन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए, और साथ ही भारत, इंडोनेशिया और आसियान देशों से व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने की ओर भी कदम बढ़ाए हैं।
चीन पर बढ़ती चिंता और सुरक्षा उपाय
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री पैट कॉनरोय ने चीन के प्रशांत द्वीपों में मिलिट्री बेस बनाने की कोशिशों पर चिंता व्यक्त की। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह स्थिति सुरक्षा के लिहाज से खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए बातचीत कर रहा है।
आगामी भविष्य में क्या होगा?
ताइवान को लेकर दुनिया की नज़रें अब चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका पर टिकी हैं। चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और ताइवान के भविष्य को लेकर चिंताएं दुनिया भर में गहराती जा रही हैं। इस बीच, जापान और ऑस्ट्रेलिया का बयान यह साफ करता है कि दोनों देशों के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा है, और वे काल्पनिक परिस्थितियों में किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंचना चाहते।
चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के सहयोगी देशों के रवैये को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। दोनों देशों की चुप्पी इस बात का संकेत है कि वे ताइवान संकट के समाधान में अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया और जापान का रवैया यह दर्शाता है कि वे चीन के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन सैन्य सहयोग पर कोई भी बयान देना अभी जल्दबाजी होगा।
