2000KM की मारक क्षमता जापान में टाइफून मिसाइल, बीजिंग तक सुनाई दी गूंज

china on typhoon missile: जरा सोचिए, अगर आपके पड़ोस में अचानक कोई 2000 किलोमीटर तक वार कर सकने वाली मिसाइल तैनात कर दे, तो आप क्या करेंगे?
चीन इस वक्त ठीक वैसी ही बेचैनी से गुजर रहा है।
कारण? अमेरिका ने जापान में टाइफून मिसाइल सिस्टम की तैनाती कर दी है, और अब बीजिंग खुलकर इसका विरोध कर रहा है।
मिसाइल की मार और चीन का डर
टाइफून मिसाइल सिस्टम, जिसे जमीन से लॉन्च किया जा सकता है, टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों से लैस है।
इसकी मारक क्षमता है 2000 किलोमीटर, यानी दक्षिण चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट, और चीन की मुख्य भूमि के कई हिस्से इसकी रेंज में आ जाते हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा
यह तैनाती केवल एक देश की नहीं, पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डालती है। ये हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देता है और सैन्य टकराव की जमीन तैयार करता है।
अमेरिका का जवाब: ये बस एक ड्रिल है!
वॉशिंगटन की तरफ से सफाई दी गई है कि ये तैनाती “रेजोल्यूट ड्रैगन” नाम की जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज का हिस्सा है, जिसमें 19,000 अमेरिकी और जापानी सैनिक भाग ले रहे हैं। ड्रिल 16 से 25 सितंबर तक चल रही है और इसका मकसद है एशिया-पैसिफिक में ताकत का प्रदर्शन और चीन को संदेश। लेकिन क्या ये सिर्फ ड्रिल है?
क्यों चिंतित है चीन?
चीन की चिंता केवल एक सिस्टम से नहीं है। यह मुद्दा ताइवान, सेंकाकू द्वीप, और दक्षिणी चीन सागर में बढ़ते अमेरिकी सैन्य प्रभाव का है।
इससे पहले भी अप्रैल 2024 में फिलीपींस में टाइफून सिस्टम की तैनाती हुई थी। तब भी बीजिंग ने कड़ा विरोध किया था। अब जब जापान, जो अमेरिका का पक्का सैन्य साझेदार है, वहां ये मिसाइल पहुंची है तो चीन को लग रहा है कि ये “First Island Chain” (जापान, ताइवान, फिलीपींस) उसे चारों ओर से घेरने की रणनीति है।
क्या एशिया एक नए ‘कोल्ड वॉर’ की ओर बढ़ रहा है?
- जापान अपनी मिड-टू-लॉन्ग रेंज मिसाइल क्षमता बढ़ा रहा है।
- उत्तर कोरिया भी आए दिन मिसाइल टेस्ट कर रहा है।
- रूस के साथ चीन की बढ़ती नजदीकी भी इस संतुलन को और अस्थिर बना रही है।
ऐसे में अमेरिका की यह तैनाती क्या सच में सिर्फ सैन्य अभ्यास है, या फिर यह एशिया में नई ताकतों के बीच दबदबे की लड़ाई का इशारा है?
मिसाइलें छुपाती नहीं, बहुत कुछ बताती हैं…
चीन की प्रतिक्रिया भले ही तेज़ हो, लेकिन वह अकेली नहीं है।

पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में आज एक मूक सैन्य दौड़ चल रही है। अमेरिका, चीन, जापान, कोरिया सभी अपने-अपने मोर्चे पर तैयारी कर रहे हैं।
क्या एशिया में एक और सैन्य टकराव की शुरुआत?
और जब मिसाइलें खुलेआम बालकनी से बाहर झांकने लगें, तब यह कहना मुश्किल नहीं होता कि असली युद्ध भले न हो, लेकिन मनोवैज्ञानिक जंग पूरी रफ्तार से चल रही है।
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