चीन की प्रतिक्रिया का विश्लेषण
बीजिंग से बुधवार को जारी बयान मध्य-स्थ शिविर में एक विशिष्ट रणनीतिक संतुलन दिखाता है। चीन के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता लिन जियान ने 22 अप्रैल को पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए आतंकवादी हमले की “कड़ी निंदा” की। उन्होंने कहा कि “चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है” और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने की अपील की ।

हालांकि, चीन ने उस हमले के पीछे मुख्य रूप से नाम लिए जाने वाले TRF या पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं किया, जबकि अमेरिका ने उसी दिन TRF को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकी (SDGT) की सूची में शामिल किया था ।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर क्या हुआ?
🇺🇸 अमेरिका का कदम
18 जुलाई को अमेरिकी विदेश विभाग ने TRF को FTO और SDGT की सूची में डाला। इसकी पृष्ठभूमि थी 22 अप्रैल के पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की हत्या ।
- FTO दर्जा मिलने से TRF पर वित्तीय और सहयोग प्रतिबंध लागू होंगे।
- SDGT बनने पर अमेरिकी क्षेत्र में TRF की संपत्तियां जब्त हो सकती हैं, और वैश्विक वित्तीय लेनदेन पर रोक लगेगी ।
चीन की प्रतिक्रिया
चीन ने हमले की नैतिक निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ विकसित देशों को एक मंच पर जोड़ने की बात कही, लेकिन उसने TRF या पाकिस्तान पर सीधे आरोप नहीं लगाया ।
यह स्पष्ट है कि चीन अब भी एक संतुलन बनाकर चलना चाहता है—जहां आतंकवाद को नाम लेकर तो निंदा करे, लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण के चलते पाकिस्तान का उल्लेख टाल दे।
पाकिस्तान और TRF की कहानी
TRF का उद्भव
TRF 2019 से अस्तित्व में आया, जब भारत ने अनुच्छेद‑370 समाप्त किया। भारत का कहना है कि यह संगठन लश्कर‑ए‑तैयबा (LeT) का प्रॉक्सी है, और इसे भारत में 2023 में आतंकी संगठन घोषित किया गया।
जब जिम्मेदारी ली और फिर मानी
22 अप्रैल को TRF ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली, लेकिन बाद में वापस हट गया—यह कहकर कि उनकी वेबसाइट हैक की गई थी। NIA ने कई दस्तावेजों में TRF को लश्कर से जोड़ा है और इसे जम्मू‑कश्मीर में हिंसा और हथियार तस्करी में शामिल पाया है।
पाकिस्तान ने सफाई दी
पाकिस्तान ने कहा कि वह उन सभी आरोपों का खंडन करता है जो TRF को LeT से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि LeT पाकिस्तान में निष्क्रिय है और TRF को भारत-निर्मित बताया ।
चीन की ‘खाली बात’ की राजनीति
चीन की नीति—जिन्हें विशेषज्ञ कहते हैं—इस प्रकार है:
- आतंकवाद की स्पष्ट निंदा: यह दिखाता है कि वे वैश्विक मंच में आतंकवाद विरोधी रुख पर कायम हैं।
- राष्ट्रवाद और रणनीतिक व्यापार: TRF या पाकिस्तान के नाम को छोड़कर चीन ने नस्लीय और क्षेत्रीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखा।
- क्षेत्रीय सुरक्षा का मामला: चीन की अपील यह संकेत देती है कि वह भारत-पाक के स्थाई तनाव से जुड़े प्रतिबद्ध रूप से शांत समाधान की वकालत करता है।
भारत पर क्या प्रभाव?
- वैश्विक समर्थन: अमेरिका की TRF टैगिंग के बाद चीन की निंदा एक अप्रत्याशित डिप्लोमेटिक सफलता है—जिसमें तीन मुख्य शक्तियाँ एक गंभीर हमले की निंदा कर रही हैं।
- राष्ट्रों का विभाजन: चीन की चुप्पी से यह साफ हुआ कि वह पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते की वजह से सीमा‑पार आतंकवाद पर सीधे आरोप नहीं लगाएगा।
- भारत की रणनीति: भारत इसके जरिए यह संदेश दे पा रहा है कि उसने वैश्विक मंच पर आतंकवाद से लड़ने के लिए पकड़े गए समूह को पाबंद कराया—चाहे वह अमेरिका हो या चीन, दोनों ही निंदा कर रहे हैं।
चीन ने आतंकवादी हमले की निंदा अवश्य की, लेकिन उसने TRF या पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। यह एक सावधानी भरा रणनीतिक कदम है जो उसे दक्षिण एशिया में संतुलन बनाये रखने में मदद देता है जबकि वह आतंकवाद विरोधी रुख भी बनाए रखता है।
