
UN में गूंजा भारत का नाम: सिर्फ़ 2 साल में रोके 4 लाख बाल विवाह, बदली सोच और बचपन!
un report 2025 on india child rights : कभी ये कहा जाता था कि भारत में हर 3 में से 1 बाल विवाह होता है। संयुक्त राष्ट्र तक चिंता ज़ाहिर करता था इस रफ्तार से अगर चले तो इस कुप्रथा को खत्म करने में 300 साल लग जाएंगे! लेकिन भारत ने दुनिया को गलत साबित कर दिखाया।
2023 से अब तक 4 लाख बाल विवाह रोके जा चुके हैं। ये आंकड़ा कोई साधारण नंबर नहीं है यह 4 लाख बच्चियों के ख्वाबों, स्कूल की घंटियों और मुस्कराहटों की जीत है।
UN में जारी हुई रिपोर्ट, कहा – भारत ने किया असंभव को संभव
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पेश की गई रिपोर्ट “Tipping Point to Zero: Evidence Towards a Child Marriage-Free India” ने साफ तौर पर बताया कि भारत में बाल विवाह की दर में 69% की गिरावट आई है। इस रिपोर्ट में शामिल एक सच्ची रणनीति ने पूरी तस्वीर बदल दी “257 हाई-रिस्क जिलों में 270 संगठनों को चुना गया। हर संगठन को सिर्फ़ 50 गांव और 6 विवाह रोकने की जिम्मेदारी दी गई। सबूत ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए गए।”
आज ये आंकड़ा 4,00,742 को पार कर चुका है और ये सिर्फ़ सरकारी दावा नहीं, हर गांव की ज़मीन से आई सच्चाई है।
राज्यवार गिरावट: असम में 84%, महाराष्ट्र-बिहार में 70% तक सुधार
जहां एक तरफ़ ये कुप्रथा सदियों से चली आ रही थी, वहीं असम, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों ने सबसे बड़ा बदलाव देखा। असम में 84% की गिरावट — यहां जागरूकता अभियान, पंचायत हस्तक्षेप और FIR की सीधी कार्रवाई ने असर दिखाया। महाराष्ट्र और बिहार में 70% तक की गिरावट — यहाँ ‘जीविका दीदी’ जैसी ग्रासरूट महिलाएं बदलाव की अगुवा बनीं।
बदला सोच का नक्शा: अब लोग चुप नहीं रहते
क्या ये बदलाव सिर्फ़ आंकड़ों का खेल है? नहीं। सबसे बड़ा बदलाव है समाज की मानसिकता में। 96% लोग अब बाल विवाह की शिकायत करने में सहज हैं। 63% तो बिना झिझक रिपोर्ट कर देते हैं। पहले जहां डर था, अब वहाँ हिम्मत और चेतना है।

आंकड़े जो जमीनी सच्चाई कहते हैं
- 73,501 बाल विवाह सिर्फ़ 2023-24 में रोके गए।
- इनमें से 59,364 पंचायतों के हस्तक्षेप से और 14,137 कानूनी कार्रवाई से रोके गए।
- NCPCR के अनुसार, 27 राज्यों में 11.5 लाख बच्चे अभी भी खतरे में हैं, सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में।
हालांकि, NCRB का एक दर्दनाक सच भी है 2022 में 3,563 केस दर्ज हुए, लेकिन सिर्फ़ 181 में मुकदमा पूरा हो पाया। यह दर्शाता है कि क़ानून तो है, लेकिन न्याय तक पहुंच अभी भी चुनौती है।
MP की मिसाल: हर जिले में लड़ाई, हर घर में जीत
मध्यप्रदेश में 41 जिलों में 36,838 बाल विवाह रोके गए। राजगढ़ जैसे जिलों में जहाँ कभी 46% बच्चियां बाल विवाह की शिकार थीं, आज वहाँ चेतना की लौ जली है। भुवन ऋभु, ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ के संस्थापक, कहते हैं:
हमने हर गांव को बदला। पंचायतों को प्रशिक्षित किया। बच्चियों को आवाज़ दी और कानून को ज़मीन पर उतारा।
