Chhind Dham Dadaji Miracles: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की बरेली तहसील के पास स्थित छींद गांव में स्थित छींद धाम हनुमान मंदिर (जिसे भक्त ‘दादाजी धाम’ के नाम से जानते हैं) न सिर्फ धार्मिक आस्था का एक केंद्र है, बल्कि यह एक ऐसा स्थल है जहां चमत्कारों की कहानियां पीढ़ियों से जीवित हैं। यहां स्थित बजरंगबली की प्रतिमा का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना बताया जाता है।
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मंदिर की प्रतिमा पहले सिर्फ एक फीट की थी, लेकिन भक्तों के अनुसार, जैसे-जैसे मंदिर की ख्याति और श्रद्धा बढ़ती गई, वैसे-वैसे मूर्ति की ऊंचाई पांच फीट तक पहुंच गई। यह विकास आज भी एक रहस्य और चमत्कार के रूप में देखा जाता है।
पीपल के नीचे विराजते हैं दक्षिणमुखी ‘दादाजी’
इस मंदिर की खास बात यह है कि हनुमानजी दक्षिणमुखी रूप में पीपल के एक वृक्ष के नीचे विराजमान हैं। हिन्दू मान्यताओं में दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर को शत्रु विनाशक माना गया है। भक्त यहां आकर मानसिक, शारीरिक और पारिवारिक कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। यही कारण है कि हर मंगलवार और शनिवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।
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मंदिर की स्थापना की कहानी: खेत से निकली चमत्कारी प्रतिमा..
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर की शुरुआत तब हुई जब एक किसान को अपनी कृषि भूमि की जुताई के दौरान बजरंगबली की प्रतिमा प्राप्त हुई। उसने श्रद्धापूर्वक उसी स्थान पर एक छोटी मढ़िया बनाकर प्रतिमा की स्थापना की।
समय के साथ भक्तों की संख्या बढ़ती गई और यह स्थल एक विशाल धार्मिक केंद्र बन गया। माना जाता है कि यहां किसी संत ने वर्षों तक साधना की थी और उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर हनुमानजी ने स्वयं इस प्रतिमा में वास किया।
श्रद्धा की मिसाल: ‘दादाजी’ से पूरी होती हर अरज…
यहां भक्त हनुमान जी को ‘दादाजी’ कहकर पुकारते हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच मंगलवार यहां हाजिरी लगाता है और श्रद्धा से प्रार्थना करता है, तो बजरंगबली उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं।
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मनोकामना पूरी होने पर भक्त यहां भंडारा, चोला चढ़ाना, झंडा अर्पित करना और भजन-कीर्तन का आयोजन करते हैं। कई भक्त पैदल यात्रा करके यहां आते हैं और अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
प्रसाद और परंपराएं…
छींद धाम में चढ़ाया जाने वाला प्रसाद भी विशेष होता है। यहां भक्त चना, गुड़ और नारियल चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि यहां बिना मांगे भी श्रद्धालु की झोली भर जाती है।

मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार को भजन-कीर्तन, हवन और विशेष आरती होती है। इन दिनों यहां मेला जैसा माहौल बन जाता है।
मंदिर कैसे पहुंचे?
स्थान: छींद गांव, तहसील बरेली, जिला रायसेन, मध्य प्रदेश
भोपाल से दूरी: लगभग 130 किलोमीटर
रायसेन से दूरी: लगभग 95 किलोमीटर
बरेली से दूरी: मात्र 7 किलोमीटर
मार्ग: भोपाल-जबलपुर रोड के जरिए, ओबेदुल्लागंज, गोहरगंज होकर आसानी से पहुँचा जा सकता है। भोपाल और जबलपुर से मंदिर के लिए विशेष वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध है।
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चमत्कारों की साक्षी है यह भूमि…
1. कहा जाता है कि अगर लगातार 5 मंगलवार छिंद जाया जाए तो हर मनोकामना पूरी होती है।
2. छींद धाम को लेकर अनेक चमत्कारी अनुभव साझा किए गए हैं। लोगों का मानना है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
3. कुछ भक्तों के अनुसार, यहां आने से टीबी, कैंसर, लकवा, यहां तक कि बांझपन जैसे गंभीर रोग भी बजरंगबली की कृपा से ठीक हो जाते हैं।
4. स्थानीय परिवारों का यह भी दावा है कि पीढ़ियों से वे इस मंदिर से जुड़े हैं और अपने जीवन में कई अलौकिक अनुभवों को देखा और महसूस किया है।

रघुवंशी परिवार की सेवा परंपरा…
मंदिर की स्थापना के बाद से ही स्वर्गीय धन्नूलाल रघुवंशी और उनके परिवार ने मंदिर की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। आज भी रघुवंशी परिवार के सदस्य नियमित पूजा, देखरेख और सेवा कार्य में लगे हुए हैं।
छींद धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और चमत्कारों का जीवंत केंद्र है। यहां की विशेषता न सिर्फ दक्षिणमुखी हनुमान की प्रतिमा है, बल्कि वह श्रद्धा और विश्वास भी है, जो भक्तों को बार-बार यहां खींच लाती है।
