आंधी-बारिश से पपीते, केले की 500 एकड़ फसल बर्बाद
वेस्टर्न डिस्टरबेंस से छत्तीसगढ़ में मई में अंधड़, ओले-बारिश का दौर जारी है। अगले 3 दिन यानी 6 मई तक कुछ इलाकों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। गरज-चमक के साथ ओले गिर सकते हैं.प्रदेश में 24 घंटे पहले आई आंधी-बारिश का असर रबी की फसल, सब्जियों और फलों में खासकर आम पर पड़ा है। भिलाई में पपीते, केले और चीकू की 500 एकड़ खेती प्रभावित हुई है।
70-80 लाख का नुकसान
इस समय यहां केला, पपीता और आम की मुख्य रूप से फसल लगी थी। गुरुवार शाम को आई तेज आंधी ने जहां पूरे केले के पेड़ को जमीन में गिरा ता तो वहीं पपीते, आम और चीकू पकने से पहले ही जमीन में चादर की तरह बिछ गए।यहां के किसान राजेश पुनिया से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अचानक जो मौसम की मार मिली है। उससे उन्हें 70-80 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।

500 एकड़ की फसल बर्बाद
अचानक आई आंधी ने इस क्षेत्र के छोटे कृषि फार्म संचालकों की फसल को भी बर्बाद कर दिया है। उनका कहना था कि फलों की फसल के भरोसे ही उनका जीवन यापन चलता था। इस बार मौसम की मार ने उन्हें बर्बाद कर दिया है। अब उन्हें शासन से कुछ मदद की दरकार है। नहीं तो वो लोग अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों का खर्च भी नहीं निकाल पाएंगे।
कृषि अधिकारी सर्वे करने पहुंचे
धमधा पूरे छत्तीसगढ़ का ऐसा क्षेत्र है, जहां सबसे अधिक सब्जियों और फलों की पैदावार हो रही है। यह क्षेत्र टमाटर की फसल के लिए मुख्य रूप से जाना जाता है। प्राकृतिक आपदा से किसानों को हुए नुकसान को लेकर मदद देने के उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग के अधिकारी यहां सर्वे करने के लिए पहुंचे।उद्यानिकी अधिकारी प्रमोद धनेंद्र ने बताया कि जिन किसानों ने पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत एडऑन बीमा योजना कवर सुविधा को लिया था उन्हें प्राकृतिक आपदा के बाद 72 घंटे के अंदर इसकी सूचना देना होता है। इसी के तहत वो लोग किसानों के नुकसान का सर्वे करने आए हैं।वहीं कुछ किसानों ने अपनी फसल का बीमा नहीं कराया था। उनके लिए सरकार दूसरी योजना के तहत कुछ हद तक नुकसान की भरपाई करेगी। इसके लिए वो उनके नुकसान की रिपोर्ट सरकार के भेजेंगे, उसके बाद वहां से ही मदद मिलेगी।
जाने क्यों बदल रहा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के पास एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय है। वहीं दूसर ट्रफ लाइन हरियाणा से केरल तक फैला है जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ में मौसम बदला हुआ है।
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