Chhattisgarh Naxal surrender 2025 : छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में नक्सल उन्मूलन के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 3 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जो नक्सल समस्या को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह घटना राज्य सरकार की बढ़ती सतर्कता और नक्सल विरोधी नीतियों का परिणाम है।
सरेंडर करने वाली नक्सलियों का विवरण
आत्मसमर्पण करने वाली तीन नक्सलियों में एक महिला नक्सली गीता उर्फ कमली सलाम भी शामिल हैं, जिन पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये नक्सली पूर्वी बस्तर डिवीजन की सक्रिय सदस्य थीं। अन्य दो नक्सली भी लॉजिस्टिक्स और संगठनात्मक कार्यों में संलिप्त थे। नक्सली नीति-2025 के तहत उनके आत्मसमर्पण को एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
सरकार की नक्सल नीति
छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल उन्मूलन के लिए “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025” शुरू की है, जिसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसके अलावा, पुनर्वास के लिए रोजगार, शिक्षा, और स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं जिससे वह मुख्यधारा में वापस आ सकें।
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नक्सलवाद पर प्रभाव
कोंडागांव में लगातार हो रहे नक्सल आत्मसमर्पण ने माओवादी गतिविधियों को काफी हद तक कमजोर किया है। सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाइयों के साथ-साथ सरकार की सामाजिक-आर्थिक विकास योजनाओं ने नक्सल समस्या पर पाबंदी लगाने में मदद की है। अधिकारियों का मानना है कि आत्मसमर्पण के ऐसे प्रयासों से नक्सल हिंसा में गिरावट आएगी।
लोगों की भागीदारी
कोंडागांव और आसपास के इलाकों के लोग अब नक्सलवाद के खिलाफ एकजुट होकर सरकार के साथ मिलकर विकास और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। लोगों में स्थिरता और शांति की भावना बढ़ी है जो नक्सल उन्मूलन की प्रक्रिया को सफल बना रही है।
कोंडागांव में तीन नक्सलियों का आत्मसमर्पण नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार की नक्सल नीति और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ में नक्सलवादी लड़ाई कमजोर होती जा रही है। यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में ऐसे कदम और बढ़ेंगे और राज्य पूरी तरह से नक्सल मुक्त बनेगा।
