छत्तीसगढ़ में DJ और साउंड सिस्टम के तेज शोर ने एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। बलरामपुर जिले में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान 15 साल के प्रवीण गुप्ता की DJ पर नाचते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि प्रतिबंध के बावजूद इतनी तेज आवाज में DJ कैसे बज रही थी और इसके लिए किसकी जवाबदेही तय हुई।

हाईकोर्ट ने जताई चिंता. पूछा बैन के बाद भी कैसे बज रहे DJ
घटना पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए पूछा है कि, प्रतिबंध के बाद भी इतनी तेज आवाज में DJ कैसे बज रही थी। अब तक इसके लिए किसकी जवाबदेही तय की गई है। कोर्ट ने इस पर शासन से डिटेल में जवाब मांगा है। वहीं, कोलाहल अधिनियम में संशोधन वाले नए कानून को जल्द लागू करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, DJ के शोर को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई चल रही है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने DJ पर जारी मीडिया रिपोर्ट्स को भी जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है। केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर राज्य सरकार को कई बार DJ को बैन करने के लिए आदेश दिया है।लेकिन, इसके बाद भी तेज आवाज वाले DJ पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका है। त्योहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों में आए दिन तेज और कर्कश आवाज वाले DJ बज रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सुनवाई में बताया गया कि, कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में कड़े प्रावधान नहीं हैं। एक-दो बार 500 से 1000 रुपए का जुर्माना लगाकर ही छोड़ दिया जाता है।न तो उपकरण जब्त होते हैं और न ही कोई ठोस कार्रवाई होती है। कोर्ट ने कहा कि, ऐसी कमजोर व्यवस्था में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती।
50 डेसिबल से ज्यादा शोर खतरनाक
इधर, रायपुर निवासी ईएनटी डॉ. राकेश गुप्ता ने हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका पेश की है। इसमें बताया कि, वर्तमान में शोर का मानक 50 डेसिबल है। एनआईटी रायपुर और एम्स की रिपोर्ट की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि, 50 डेसिबल से ऊपर की आवाज सीधे मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि लगातार तेज आवाज से सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और मानसिक तनाव बढ़ता है।
त्योहारों में 95 से 110 डेसिबल तक शोर
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि, हाल ही में हुए त्योहारों के दौरान DJ संचालकों ने मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई। रायपुर और अन्य जिलों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक डीजे के शोर का स्तर 95 से 110 डेसिबल तक रिकॉर्ड किया गया, जबकि निर्धारित सीमा 50 डेसिबल है। सीजे सिन्हा की बेंच ने कहा कि यह स्थिति न केवल कानून की अवहेलना है बल्कि नागरिकों के जीवन और सेहत के लिए गंभीर खतरा भी है।
मुख्य सचिव से मांगा नया शपथ पत्र
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को प्रस्तावित संशोधनों की स्थिति को लेकर अपना व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब समिति और कानून विभाग दोनों ही बदलाव की जरूरत मान चुके हैं, तो अब नए प्रावधान लागू करने में देर करना उचित नहीं है।
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