
chhattisgarh teacherless education reform 2025 : एकल शिक्षकीय शालाओं में 80% की कमी
chhattisgarh teacherless education reform 2025 : छत्तीसगढ़ ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए पूरे देश के लिए मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व और शिक्षा को प्राथमिकता देने वाली दूरदर्शी नीतियों के चलते प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में अब कोई भी छात्र शिक्षक के बिना नहीं पढ़ रहा है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ वर्ष पहले तक राज्य के हजारों स्कूलों में या तो शिक्षक नहीं थे या सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे ही पूरे स्कूल की जिम्मेदारी थी। लेकिन अब, 80% से अधिक एकल शिक्षकीय स्कूलों की समस्या खत्म कर दी गई है, और यह सब संभव हो सका है युक्तियुक्तकरण (Rationalization) नामक रणनीतिक योजना से।
क्या है युक्तियुक्तकरण योजना?
युक्तियुक्तकरण यानी Rationalization of Teachers एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें राज्य के शैक्षणिक संसाधनों का न्यायसंगत और संतुलित उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य है कि जहां ज़रूरत है, वहां शिक्षक तैनात किए जाएं और जहां ज़्यादा शिक्षक हैं, वहां से उन्हें समायोजित किया जाए।
इन बिंदुओं पर फोकस किया गया
शिक्षकों की तर्कसंगत पदस्थापना
शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) का पूर्ण पालन
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप स्कूलों की संरचना और शिक्षक संख्या का संतुलन
समस्या कितनी बड़ी थी?
युक्तियुक्तकरण से पहले छत्तीसगढ़ में:
453 विद्यालय ऐसे थे, जो पूरी तरह शिक्षकविहीन थे।
5,936 विद्यालय ऐसे थे, जहां सिर्फ एक शिक्षक कार्यरत था।
यह स्थिति विशेष रूप से बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, कोरबा, बलरामपुर जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित जिलों में अत्यधिक थी।
सरकार ने क्या किया?
राज्य सरकार ने इस समस्या को चरणबद्ध तरीके से हल किया। तीन स्तरों पर युक्तियुक्तकरण किया गया:
- जिला स्तर पर काउंसलिंग
शिक्षकों की नियुक्ति और स्थानांतरण की प्रक्रिया स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से की गई।
- संभाग स्तर पर समीक्षा
विभिन्न संभागों में आंकड़ों के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की गई।
- राज्य स्तर पर नीति निर्माण और निगरानी
राज्य स्तर से सभी आंकड़ों की निगरानी, समीक्षा और आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
इन तीन स्तरों की काउंसलिंग और तैनाती प्रक्रियाओं के चलते आज प्रदेश का कोई भी सरकारी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है।
जिलावार एकल शिक्षकीय स्कूलों की स्थिति (अब तक की बची शालाएं)
| जिला | एकल शिक्षक स्कूल (अभी शेष) |
| बस्तर | 283 |
| बीजापुर | 250 |
| सुकमा | 186 |
| मोहला-मानपुर-चौकी | 124 |
| कोरबा | 89 |
| बलरामपुर | 94 |
| नारायणपुर | 64 |
| धमतरी | 37 |
| सूरजपुर | 47 |
| दंतेवाड़ा | 11 |
| अन्य जिले | 22 |
इन स्कूलों में भी जल्द ही नई नियुक्तियों और पदोन्नतियों के ज़रिये शिक्षकों की तैनाती की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस सफलता को “शिक्षा में सामाजिक न्याय” करार देते हुए कहा:
“हमने यह ठान लिया था कि छत्तीसगढ़ में अब कोई बच्चा शिक्षक के बिना नहीं पढ़ेगा। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से हम न केवल RTE अधिनियम का पालन कर रहे हैं, बल्कि एक मजबूत और समान शिक्षा प्रणाली की नींव रख रहे हैं। यह सिर्फ स्थानांतरण नहीं, बल्कि शिक्षा में न्याय की पुनर्स्थापना है।”
आगे की योजना क्या है?
सरकार अब उन 1,207 प्राथमिक विद्यालयों पर फोकस कर रही है, जहां अभी भी सिर्फ एक शिक्षक कार्यरत है। इसके समाधान के लिए निम्न कदम उठाए जा रहे हैं:
प्रधान पाठकों की पदोन्नति
नई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया
विशेष संवेदनशील जिलों में त्वरित पदस्थापना
साथ ही, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा और मल्टी-ग्रेड टीचिंग पर भी निवेश किया जा रहा है।
इसका असर क्या होगा?
छात्रों को समय पर पढ़ाई मिलेगी
शिक्षकों पर कार्यभार संतुलित होगा
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा
शिक्षा छोड़ने (dropout) की दर में गिरावट आएगी
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