छत्तीसगढ़ नई किताबें 2025: संस्कृति, लोक‑कला और सहायक वाचन का नया चेहरा
आने वाले शैक्षणिक सत्र 2026‑27 से, छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पढ़ाई का चेहरा बदलने वाला है। अब पाठ्यपुस्तकों में सिर्फ गणित‑भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, लोक‑कला, रीति‑रिवाज और स्थानीय जीवन की कहानियां भी होंगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने तय किया है कि कक्षा तीसरी से आठवीं तक सहायक वाचन प्रणाली को फिर से लागू किया जाए ताकि बच्चा अपनी मिट्टी, इतिहास और परंपरा से जुड़ा महसूस कर सके।
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छत्तीसगढ़ नई किताबें 2025: लोक व्यवहार, खान‑पान, त्योहार और रीति‑रिवाज
नए पाठ्यक्रम में सिर्फ पाठ और व्याकरण नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के हर जिले की खासियतें शामिल होंगी।बच्चों को सिखाया जाएगा कि:उनके इलाके में किन‑किन त्योहारों का उत्सव मनाया जाता है,किस तरह के लोक गीत, नृत्य, वाद्य यंत्र वहाँ प्रचलित हैं,किस प्रकार की भोजन‑व्यवस्था होती है, पारंपरिक व्यंजन क्या होते हैं,विवाह‑सगाई या त्यौहारों पर कौन‑कौन सी रस्में होती थीं,स्थानीय बर्तन, नदियाँ, प्राकृतिक धरोहरें, औषधीय पौधे और स्थानीय जीव‑जंतु सबकी जानकारी दी जाएगी।इससे बच्चे अपनी ज़मीन और उनकी सांस्कृतिक जड़ों को समझेंगे।
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नींव मजबूत और पढ़ाई मज़बूत
प्राथमिक स्तर से ही विभाग ने भाषा और गणित को मजबूत करने पर जोर दिया है।कक्षा पहली‑दूसरी में बारहखड़ी अनिवार्य होगी, ताकि हिंदी की मूल समझ गहरी बने। तीसरी‑चौथी में रेमिडियल क्लास के माध्यम से कमजोर बच्चों को पकड़ने की व्यवस्था बनेगी।
योग, कला और व्यावसायिक पढ़ाई से आत्मनिर्भर बच्चे
नए पाठ्यक्रम में कक्षा तीसरी में योग एवं शारीरिक शिक्षा, तथा छठवीं में कलात्मक और व्यावसायिक शिक्षा को शामिल किया गया है।इसका मतलब ये है कि बच्चे पढ़ाई के साथ साथ स्वास्थ्य, कला‑कौशल और जीवन‑कौशल सीखेंगे जो उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा।
