chhattisgarh raigarh mankeshwari devi: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हर साल शरद पूर्णिमा के दिन एक अजीबोगरीब परंपरा निभाई जाती है, जो किसी को चौंकाती है, तो किसी के लिए यह आस्था का विषय है। करमागढ़ गांव के मानकेश्वरी देवी मंदिर में एक बैगा सार्वजनिक रूप से 40 बकरों की बलि देने के बाद उनका खून पीता है। इस परंपरा का वीडियो हाल ही में वायरल हुआ है, जिससे यह प्रथा फिर सुर्खियों में है
देवी आती हैं बैगा के शरीर में, नहीं होता कोई असर!
मानकेश्वरी देवी के भक्तों के मुताबिक इतना खून पीने के बाद भी बैगा के शरीर में कोई साइड इफेक्ट नजर नहीं आता। उनकी माने तो इस दिन बैगा के शरीर में देवी आतीं हैं और वो बलि दिए गए बकरों का खून पीती हैं। बल पूजा के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाता है।
chhattisgarh raigarh mankeshwari devi: जाने कौन हैं मानकेश्वरी देवी?
रायगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 27 किमी दूर करमागढ़ में विराजी मां मानकेश्वरी देवी रायगढ़ राजघराने की कुल देवी हैं। शरद पूर्णिमा के दिन दोपहर बाद यहां बलि पूजा शुरू हुई। जहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।श्रद्धालुओं के मुताबिक जिनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे यहां बकरा और नारियल लाकर चढ़ाते हैं। ग्रामीणों की माने तो पहले 150 से 200 बकरों की बलि दी जाती थी, लेकिन कोरोना काल के बाद से इनकी संख्या करीब 100 तक हो गई है। अब और कम होकर 40 पहुंच गई है।
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chhattisgarh raigarh mankeshwari devi: बलि से पहले होती है ‘निशा पूजा
मानकेश्वरी देवी पूजन समिति के पूर्व अध्यक्ष युधिष्ठिर यादव ने बताया कि बलि पूजा से एक रात पहले यानी 5 अक्टूबर को निशा पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की गई। जब यह पूजा होती है, तो राज परिवार से एक ढीली अंगूठी बैगा के अंगूठे में पहनाई जाती है।हालांकि ये अंगूठी बैगा के नाप की नहीं होती, लेकिन बलि पूजा के दौरान बैगा के अंगूठे में वो अंगूठी पूरी तरह से कस जाती है। इससे एहसास होता है कि अब देवी का वास बैगा के शरीर में हो गया है। उसके बाद श्रद्धालु बैगा के पैर धोते हैं और सिर पर दूध डालकर पूजा करते हैं।
chhattisgarh raigarh mankeshwari devi: धार्मिक आस्था या अंधविश्वास?
जहां ग्रामीण इसे भक्ति और चमत्कार मानते हैं, वहीं यह परंपरा आधुनिक समाज में कई सवाल खड़े करती है। एक इंसान द्वारा खून पीना और खुलेआम बलि देना आज भी कानून और मानवीय मूल्यों के खिलाफ माना जाता है। लेकिन आस्था के आगे किसी की हिम्मत नहीं होती कुछ बोलने की।
सैकड़ों श्रद्धालु, गांव-गांव से जुटते हैं लोग
बलि देखने और पूजा में भाग लेने के लिए रायगढ़, सुंदरगढ़ (ओडिशा), सारंगढ़, विजयपुर, बंगुरसिया, तमनार, और हमीरपुर जैसे गांवों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस आयोजन में सैकड़ों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन किसी ने आज तक इसका खुलकर विरोध नहीं किया।
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