Chhattisgarh Liquor Scam 2026: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. ED की जांच में पता चला है कि 2019 से 2023 के बीच राज्य के आबकारी विभाग में एक संगठित सिंडिकेट ने शराब नीति का दुरुपयोग कर करीब 2883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की. ED के मुताबिक, इस घोटाले में अफसर, नेता और शराब कारोबारी सभी शामिल थे। सिंडिकेट ने नीति को अपने फायदे के लिए मोड़ा और अवैध कमीशन, बिना हिसाब की शराब बिक्री और विशेष लाइसेंस के जरिए भारी मुनाफा कमाया।
Chhattisgarh Liquor Scam 2026: इन तरीकों से की अवैध कमाई
- अवैध कमीशन: शराब सप्लायरों से सरकारी बिक्री पर रिश्वत वसूली गई। इसके लिए शराब की कीमत जानबूझकर बढ़ाई गई और इसका बोझ सरकारी खजाने पर डाला गया।
- बिना रिकॉर्ड की शराब बिक्री: डुप्लीकेट होलोग्राम और नकद में खरीदी गई बोतलों के जरिए सरकारी दुकानों से ऑफ-द-बुक्स देशी शराब बेची गई, और टैक्स चोरी हुई।
- कार्टेल कमीशन: शराब कंपनियों से सालाना कमीशन वसूला गया ताकि उनका बाजार में हिस्सा और लाइसेंस सुरक्षित रहे।
- FL-10A लाइसेंस: विदेशी शराब कंपनियों से मुनाफे का करीब 60% हिस्सा सिंडिकेट तक पहुंचाने के लिए नया लाइसेंस कैटेगरी बनाई गई है
Chhattisgarh Liquor Scam 2026: आरोपियों की लिस्ट
अफसर और अधिकारी: पूर्व IAS अनिल टुटेजा, तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास, CSMCL के एमडी अरुण पति त्रिपाठी, करीब 30 फील्ड लेवल आबकारी अधिकारी
राजनीतिक चेहरे: तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल, सीएम ऑफिस की तत्कालीन डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया
निजी लोग और कंपनियां: अनवर ढेबर और सहयोगी अरविंद सिंह,कई शराब कंपनियां जो अवैध खेल में शामिल थीं, नकली होलोग्राम सप्लाई और कैश कलेक्शन करने वाले लोग
अब तक क्या हुआ
ED ने 9 बड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें अफसर, मंत्री और कारोबारी शामिल हैं. 382 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां जब्त की गईं, जिसमें 1041 चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं. मामले की जांच अभी जारी है, और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।
