भारत के युवा शतरंज ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने 18 साल की उम्र में वह कर दिखाया, जो हर किसी के लिए एक सपना ही रह जाता है। गुरुवार, 12 दिसंबर को, गुकेश ने चीन के डिफेंडिंग चैंपियन डिंग लिरेन को हराकर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीत ली। सिंगापुर में आयोजित इस प्रतियोगिता में 14 राउंड की कड़ी टक्कर के बाद गुकेश ने खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ, गुकेश न केवल सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन बने, बल्कि अपने 7 साल पुराने सपने को भी साकार कर दिखाया।
7 साल पुराना वादा पूरा किया
गुकेश ने जब सिर्फ 11 साल के थे, तब उन्होंने एक इंटरव्यू में सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन बनने की इच्छा जताई थी। उस समय शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि वो अपनी इस महत्वाकांक्षा को सच कर दिखाएंगे। 7 साल 2 महीने बाद, उन्होंने 18 साल 8 महीने और 14 दिन की उम्र में यह खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।
ऐसे मिली ऐतिहासिक जीत
चैंपियनशिप में अंतिम मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। 13 राउंड के बाद गुकेश और डिंग दोनों 6.5-6.5 की बराबरी पर थे। निर्णायक 14वें राउंड में गुकेश ने संयम और आत्मविश्वास दिखाते हुए अनुभवी डिंग लिरेन को मात दी। जैसे ही डिंग ने हार स्वीकार की, गुकेश के चेहरे पर खुशी और राहत साफ झलक रही थी। उनकी आंखों में आंसू थे, जो उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे की मेहनत और संघर्ष को दर्शा रहे थे।
भावनात्मक पल और परिवार का साथ
जीत के तुरंत बाद गुकेश ने अपने पिता को गले लगाकर अपनी भावनाएं साझा कीं। यह पल न केवल उनके लिए, बल्कि उनके परिवार के लिए भी बेहद खास था। उनके पिता के चेहरे पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।
गुकेश की परिपक्वता
इतनी छोटी उम्र में दुनिया जीत लेना हर किसी के बस की बात नहीं। अक्सर चैंपियन अपनी उपलब्धियों पर बड़े दावे करते हैं, लेकिन गुकेश ने यहां भी अपनी परिपक्वता का परिचय दिया। जीत के बाद उन्होंने डिंग लिरेन की जमकर तारीफ की और उनकी हार पर खेद जताया। उन्होंने डिंग को एक सच्चा वर्ल्ड चैंपियन बताया और उनकी कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए उनका सम्मान किया।
गुकेश का संयम और प्रतिबद्धता
गुकेश का यह सफर उनकी कड़ी मेहनत और आत्मसंयम का उदाहरण है। शतरंज खिलाड़ियों के लिए अपनी भावनाओं पर काबू रखना बेहद जरूरी होता है, और गुकेश ने इस कला में महारत हासिल की है। हालांकि, इस जीत के बाद उनके संयमित व्यक्तित्व में भावनाओं की झलक भी नजर आई, जो उनकी सफलता और मानवीयता दोनों को दर्शाता है।
भारत का चमकता सितारा
डी गुकेश की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत है, बल्कि भारतीय शतरंज के लिए भी एक बड़ी सफलता है। यह दिखाता है कि कैसे मेहनत, सपना, और प्रतिबद्धता के साथ असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। अब गुकेश दुनिया के सबसे बड़े मंच पर अपनी पहचान बना चुके हैं और यह यकीनन उनके सुनहरे करियर की शुरुआत भर है।
