तेल कंपनियों की 25 गुना बढ़ी कमाई, लेकिन आम आदमी को फायदा नहीं मिला

भारत के लिए रूस से सस्ता तेल मिलना एक सौगात जैसा था, लेकिन इस सस्ते तेल का असली फायदा किसे हुआ? तेल कंपनियां और सरकार तो मालामाल हो गईं, लेकिन आम आदमी को इससे कुछ खास राहत नहीं मिली। तीन सालों से भारत को रूस से 5 से 30 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर तेल मिल रहा है, लेकिन इस सस्ते तेल के लाभ का बड़ा हिस्सा रिलायंस, नायरा जैसी प्राइवेट कंपनियों और सरकारी तेल कंपनियों के पास चला गया। सरकार को 35% फायदा हुआ, जबकि आम आदमी को कोई खास राहत नहीं मिल पाई।
इस लेख में हम आपको समझाएंगे कि क्यों सस्ता तेल आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा, और यह फायदा किन-किन के हाथों में जा रहा है।
सस्ते तेल का फायदा क्यों नहीं मिल रहा आम आदमी को?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आए दिन उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन सस्ते तेल का फायदा आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंचता? इसका कारण है टैक्स और कंपनियों का मुनाफा।
भारत में तेल की कीमतों पर सरकार और तेल कंपनियों का सीधा नियंत्रण है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। केंद्र सरकार पेट्रोल पर 13 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लेती है। इसके अलावा, राज्य सरकारें वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) लगाती हैं। नतीजा ये होता है कि पेट्रोल की कीमत का लगभग 46% और डीजल की कीमत का 42% हिस्सा टैक्स में चला जाता है।

केंद्र सरकार हर साल इस टैक्स से 2.7 लाख करोड़ रुपए और राज्य सरकारें 2 लाख करोड़ रुपए कमाती हैं। ऐसे में सस्ता तेल होने के बावजूद सरकार इस पैसे को अपने खजाने में रखती है, ताकि अपनी अन्य खर्चों को पूरा किया जा सके। आम आदमी को इसका कोई खास लाभ नहीं मिलता।
तेल कंपनियों का मुनाफा: सस्ता तेल, बड़ा मुनाफा
भारत की सरकारी तेल कंपनियों के मुनाफे में रूस से सस्ता तेल आने के बाद जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। 2022-23 में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने मिलकर 86,000 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। जबकि 2022-23 में इन कंपनियों का मुनाफा सिर्फ ₹3,400 करोड़ था।
इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी प्राइवेट कंपनियों ने भी सस्ते तेल के साथ बड़े मुनाफे कमाए। रिलायंस ने प्रति बैरल 12.5 डॉलर और नायरा ने 15.2 डॉलर का रिफाइनिंग मार्जिन प्राप्त किया। इन कंपनियों का कहना है कि यह मुनाफा रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मिले डिस्काउंट की वजह से हुआ है, जो पहले 30 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 3-6 डॉलर प्रति बैरल रह गया है।
इस सस्ते तेल का सबसे बड़ा हिस्सा रिलायंस और नायरा के पास जा रहा है, जो अब रूस से 45% तेल आयात कर रहे हैं। भारत का लगभग 30% तेल रूस से आता है। यह सस्ता तेल प्रोसेस करके इन्हें अमेरिका, यूरोप, और यूएई जैसे देशों में बेचा जाता है।
रूस से सस्ता तेल खरीदने का भारत पर प्रभाव
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, जब यूरोप ने रूस के तेल पर प्रतिबंध लगा दिया, तब रूस ने अपने तेल का रुख एशिया की तरफ मोड़ लिया। भारत ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए सस्ता तेल खरीदना शुरू किया। 2021 में रूस से केवल 0.2% तेल आयात हो रहा था, लेकिन 2023 तक यह बढ़कर 2.15 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया। अब रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, और भारत की कुल तेल जरूरत का 37% रूस से आता है।

भारत को रूस से तेल खरीदने के कई फायदे हैं, जैसे सस्ता तेल: रूस अभी भी भारत को सस्ता तेल दे रहा है, जिससे भारत को 1 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है। लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स: भारत की बड़ी कंपनियों के रूस के साथ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स हैं, जिनसे तेल की आपूर्ति निरंतर बनी रहती है। वैश्विक कीमतों पर प्रभाव: अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो वैश्विक तेल कीमतें बढ़ सकती हैं। 2022 में, तेल की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
क्या भारत को रूस से तेल खरीदने से रोकना चाहिए?
भारत के लिए रूस से तेल खरीदने के कई फायदे हैं, लेकिन फिर भी इसे रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक राजनीति के संदर्भ में देखा जाता है। भारत ने इसे पूरी तरह पारदर्शी बताया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह नैतिकता और वैश्विक तनाव के लिहाज से सही है?
अभी तक, भारत ने अपने तेल आयात के फैसले को आर्थिक दृष्टिकोण से लिया है, लेकिन इस पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। भारत का कहना है कि रूस से सस्ता तेल वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने में मदद करता है और गैरकानूनी नहीं है।
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