Chardham Yatra Green Card: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के लिए ग्रीन कार्ड व्यवस्था लागू कर दी गई है। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने हरिद्वार में इसका शुभारंभ किया, जिसके तहत नारसन, रोशनाबाद और ऋषिकेश में 3 केंद्रों पर पंजीकरण की सुविधा शुरू हुई है।

परिवहन विभाग की पहल
विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को बेहतर बनाने के लिए परिवहन विभाग ने यह पहल की। रोशनाबाद स्थित RTO कार्यालय में शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत यात्रा में शामिल होने वाले वाहनों का पंजीकरण किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रा को ज्यादा सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को जांच और बाधाओं से राहत मिल सके और वे बिना परेशानी अपनी यात्रा पूरी कर सकें। इस बार चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल 2026 से होगा, जिसके लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
कितना लगेगा शुल्क?
परिवहन विभाग ने चारधाम यात्रा के लिए वाहनों का ग्रीन कार्ड शुल्क तय किया है। इसके तहत छोटे वाहनों के लिए 450 रुपए और बड़े वाहनों के लिए 650 रुपए राशि निर्धारित की गई है। पिछले साल इस व्यवस्था के तहत 7500 से ज्यादा वाहनों के ग्रीन कार्ड बनाए गए थे, जिससे यात्रा संचालन में स्पष्ट सुधार देखने को मिला था। दरअसल, ग्रीन कार्ड एक प्रमाण पत्र होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि वाहन यात्रा के लिए पूरी तरह फिट है और उसके सभी दस्तावेज वैध हैं।

Chardham Yatra Green Card: कैसे होगी जांच?
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि चारधाम यात्रा को सफल, सुरक्षित और आसान बनाने के लिए जरूरी सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के साथ ग्रीन कार्ड भी दिया जाएगा, जिसमें वाहन के सभी दस्तावेजों की जांच होगी। उन्होंने कहा, ग्रीन कार्ड QR कोड, Payym और Whatsapp के जरिए भी लिया जा सकता है। एक बार ग्रीन कार्ड मिल जाने के बाद पूरी यात्रा में परेशानी नहीं होगी और एक ही कार्ड से यात्रा पूरी की जा सकेगी। वाहनों की फिटनेस बॉर्डर पर जांची जाएगी। इसमें टायर, प्रदूषण मानक और जरूरी नियम शामिल होंगे।
बॉर्डर एंट्री पॉइंट
चारधाम यात्रा के लिए ग्रीन कार्ड मिलने से पहले वाहनों की विस्तृत जांच बॉर्डर एंट्री पॉइंट पर ही की जाएगी। इसमें टायर की स्थिति, वाहन का इंश्योरेंस, वैध परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच होगी। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही ग्रीन कार्ड दिया जाएगा। एक बार ग्रीन कार्ड मिलने के बाद पूरे यात्रा मार्ग में दोबारा जांच की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों को बार-बार रोक से राहत मिलेगी।
