char dham yatra 2025 gangotri yamunotri : पहलगाम हमले के डर से मुक्ति!
char dham yatra 2025 gangotri yamunotri : चारधाम यात्रा के पहले दिन ही 13 हजार श्रद्धालुओं ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन किए। पहलगाम में हुए हमले के डर के बावजूद, श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा शुरू कर दी। हरिद्वार से पैदल चलकर गंगोत्री धाम पहुंचे यमराज गिरि ने अपनी यात्रा की तैयारियों के बारे में बताया, लेकिन पहलगाम हमले पर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की।
यात्रा का शुभारंभ
चारधाम यात्रा 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट खुलने के साथ शुरू हुई थी। पहले दिन शाम पांच बजे तक सात हजार लोगों ने यमुनोत्री धाम के दर्शन किए। गंगोत्री धाम में मां गंगा के मंत्रोच्चार के साथ तीर्थयात्रा की शुरुआत हुई। पहले दिन करीब 6 हजार तीर्थयात्री यहां पहुंचे।
उत्तराखंड के सीएम का संदेश
पहले दिन उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी भी यमुनोत्री धाम पहुंचे। यमुना धाम के कपाट खुलने के बाद सीएम ने तीर्थ पुरोहितों के साथ पूजा-अर्चना की। सीएम धामी ने कहा, “हमारा प्रयास है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उनकी यात्रा सुरक्षित हो। हम लगातार निगरानी कर रहे हैं।”
आगामी कपाट खुलने की तारीखें
अब केदारनाथ के कपाट 2 मई को सुबह 7 बजे और बद्रीनाथ धाम के कपाट 4 मई को सुबह 6 बजे खुलेंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है, जब वे अपने प्रिय देवताओं के दर्शन कर सकेंगे।

सुरक्षा व्यवस्था
मंदिर में क्यूआरटी टीम सतर्क है और बाहरी लोगों की जांच कर रही है। ड्यूटी पर तैनात यमुनोत्री सीओ सुशील रावत कहते हैं, “चारधाम यात्रा के लिए यहां सुरक्षा व्यवस्था सख्त है। बाहरी लोगों की लगातार जांच की जा रही है। मंदिर में एक क्यूआरटी टीम तैनात की गई है। यहां विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। सभी को सतर्क कर दिया गया है।”
विक्रेताओं की पहचान
बाहर से आकर यहां सेवाएं देने वाले विक्रेताओं की पहचान निर्धारित करने के लिए खच्चर मालिकों की जांच और पंजीकरण जानकी चट्टी से किया जाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई अनधिकृत व्यक्ति यहां प्रवेश न कर सके।
यमुनोत्री धाम की शोभा
चार धाम यात्रा के प्रथम पड़ाव माने जाने वाले यमुनोत्री धाम को फूलों और लाइटों से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने सूर्यकुंड के गर्म जल में स्नान कर मां यमुना की पूजा-अर्चना की। यमुनोत्री धाम के मुख्य पुजारी कहते हैं, “मां यमुना शीतकाल में छह महीने तक अपने मायके खरसाली गांव में रहती हैं। इसके बाद अक्षय तृतीया के दिन वह उत्तरकाशी स्थित अपने निवास स्थान पर पहुंचते हैं। कपाट खुलते ही चारधाम यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो जाती है।”
यमुनोत्री धाम का महत्व
यमुनोत्री धाम को चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यमराज ने अपनी बहन यमुना को 22 वचन दिए थे। एक कहावत है कि जो भी यमुनोत्री धाम में आकर दर्शन करता है, उसे यमलोक से मुक्ति मिल जाती है। वह सूर्य को प्राप्त करता है।
चारधाम यात्रा के पहले दिन ही 13 हजार श्रद्धालुओं का आगमन एक बड़ी उपलब्धि है। पहलगाम हमले के डर से मुक्ति पाकर श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा शुरू की है। उत्तराखंड सरकार और सुरक्षा बलों की सख्त व्यवस्था के कारण यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से चल रही है। आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है।
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