Kainchi Dham: तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कसा तंज
Kainchi Dham: उत्तराखंड की धार्मिक स्थलीकरण चार धाम यात्रा में भारी गिरावट की खबर ने सबको झकझोर दिया है।
तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने दो महत्वपूर्ण ध्यान देने वाले आंकड़े पेश किए:
- चारधाम यात्रा में 2024 में लगभग 54.42 लाख श्रद्धालु गए थे, जो 2025 में 46.20 लाख रह गए—16% की गिरावट।
- वहीं कैंची धाम (नीम करौली बाबा) में 2023 में 8 लाख श्रद्धालुओं की तुलना में 2024–25 में 24 लाख से अधिक की भीड़ उमड़ी—300% से अधिक की वृद्धि।
📉 चारधाम – क्यों कम हो रही भीड़?
भारत-विदेशी श्रद्धालु और सरकारी रिकॉर्ड का अध्ययन दिखाता है:
- SDC Foundation के अनुसार, चारधाम यात्रा के पहले महीने (30 अप्रैल–30 मई 2025) में 17.17 लाख श्रद्धालु गए, जो पिछले वर्ष 19.56 लाख थे—a 12% की गिरावट।
- आधे पहले सप्ताह (30 अप्रैल–6 मई) की तुलना में यात्रा में 26% की तेज गिरावट दर्ज की गई ।
- 2 सप्ताह में यह गिरावट लगभग 31% थी, लगभर 3 लाख श्रद्धालुओं की कमी ।
- 12 दिनों में संख्याएं बरकरार बनीं—इस साल 5.5 लाख vs पिछले साल 8 लाख; 30% घटकर ।
महापंचायत ने ये घटती संख्या सरकारी ब्यवस्थाओं, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, और पर्यटन विभाग की लापरवाही से जोड़ी है।

📈 कैंची धाम – क्यों बढ़ी भीड़?
- केवल 1 अप्रैल 2024–31 मार्च 2025 के बीच कैंची धाम में 24 लाख श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया—2023 की 8 लाख की संख्या से 300% का उछाल ।
- अकेले प्रति दिन औसतन 6,666 श्रद्धालु; जबकि चारधाम में यह संख्या 6,416 ही है—यानी कैंची धाम प्रतिदिन चारों धामों से अधिक भीड़ आकर्षित करता है ।
महापंचायत का आरोप है कि सरकार ने चारधाम को भुले, जबकि कैंची धाम में सड़क, प्रचार तथा रजिस्ट्रेशन जैसे कदम उठा रही है।
⚖️ सरकार का पक्ष
- बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि चारधाम में कॉम्प्लेक्स भौगोलिक और मौसम संबंधी चुनौतियाँ हैं।
- चारधाम यात्रा के दौरान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, दुर्गम पहाड़ी सड़कें, और भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी सरकार की है, जो की जा रही है।
- उन्होंने कैंची धाम की तुलना चारधाम से “नाइंसाफी” बताया ।
🏛️ कांग्रेस की प्रतिक्रियाएं
- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने महापंचायत की आलोचना का समर्थन करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा में सरकारी व्यवस्थाओं की कमी स्पष्ट है।
- मार्ग में जाम, सुरक्षा कमजोरियां और हकीकत में यात्रा कर आएयात्री संख्या में गिरावट उनके ठोस अनुभवों के आधार हैं।
🚗 भौगोलिक-लॉजिस्टिक कारण
- दिल्ली से चारधाम तक की दूरी 400‑550 किमी है जबकि कैंची धाम मात्र 340 किमी दूर और सुलभ सड़क मार्ग से जुड़ा है।
- चारधाम को श्राद्धकालीन ट्रेकिंग की भी चुनौती होती है, जबकि कैंची धाम आसानी से सुलभ है—जिससे शहर‑नजदीकी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी।
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