Chamoli Rudraprayag cloudburst 2025 : उत्तराखंड एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप का शिकार हुआ है। शुक्रवार सुबह चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। गांव और कस्बे प्रभावित हुए, कई घर ढह गए और लोग मलबे में दब गए। प्रशासनिक टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। स्थानीय लोग सहमे हुए हैं और ‘जिंदगी’ की तलाश अब मलबे के बीच हो रही है।
बादल फटने से भारी तबाही
चमोली जिले में अचानक हुई तेज बारिश और बादल फटने से नदी-नाले उफान पर आ गए। कई ग्रामीण बस्तियां जलमग्न हो गईं। रुद्रप्रयाग में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे जहां नाले में आई बाढ़ ने घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया। अब तक कई लोग लापता बताए जा रहे हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
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‘जिंदगी’ की तलाश में जुटे राहतकर्मी
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। जेसीबी और बचाव उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश जारी है। जवान लगातार मलबा हटाने का काम कर रहे हैं, ताकि दबे हुए लोगों को जीवित बाहर निकाला जा सके। हेलीकॉप्टरों की मदद से भी प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
भय और दहशत से घिरे लोग
ग्रामीणों में खौफ और चिंता का माहौल है। कई परिवार बेघर हो गए हैं और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे अधिक गंभीर है। स्थानीय लोग बताते हैं कि तेज बारिश के बाद अचानक आई जलप्रलय ने उन्हें संभलने का भी मौका नहीं दिया।
सरकार और प्रशासन की मजबूती से कार्रवाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की समीक्षा की है और जिला अधिकारियों को हर संभव मदद का निर्देश दिया है। प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे और पुनर्वास की घोषणा भी की गई है। राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त मदद की मांग की है ताकि राहत एवं बचाव कार्यों को और तेज किया जा सके।
देवभूमि उत्तराखंड में आई इस तबाही ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग की यह त्रासदी हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील और सतर्क रहने का संदेश देती है। फिलहाल स्थानीय लोग मलबे में अपने अपनों की जिंदगी के निशान खोज रहे हैं और पूरा प्रदेश उनकी सलामती की दुआ कर रहा है।
