Chamoli cloudburst basic amenities shortage : चमोली जिले में बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई थी इस प्राकृतिक आपदा में कई घर और सड़कें धराशायी हो गईं तथा स्थानीय निवासियों को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पानी, बिजली, चिकित्सा और आवागमन जैसी सबसे जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
हाईकोर्ट की फटकार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चमोली में आपदा प्रभावित इलाकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की लापरवाही और बदलती स्थिति के प्रति उदासीनता पर कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने राज्य सरकार को प्रभावितों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने और राहत कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि पहाड़ी राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाओं को ध्यान में रखकर सरकार को सजग रहना चाहिए। इसके लिए एक प्रभावी आपदा प्रबंधन नीति आवश्यक है, जो समय-समय पर अपडेट होती रहे। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, आवासीय सहायता और आवागमन के साधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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स्थानीय लोगों की दिक्कतें
धराशायी सड़कों और टूटे पुलों के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं। प्रभावित लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा, आपदा के बाद शिक्षा और अन्य सामाजिक सेवाएं भी प्रभावित हो गई हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट की फटकार राज्य सरकार के लिए एक चेतावनी है कि आपदा प्रबंधन में गंभीरता बरतें। चमोली की हालिया आपदा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता जीवन और सम्मान दोनों के लिए आवश्यक है। राज्य प्रशासन को जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए तत्पर रहना होगा और दीर्घकालीन क्षति निवारण के लिए ठोस योजना बनानी होगी।
