चैतन्यानंद के कमरे से सेक्स टॉय व पोर्न सीडी तस्वीरों की सच्चाई, छात्राओं की आहें

Chaitanyanand Scandal Sex Toy Fake Photos Exposed: दिल्ली पुलिस ने उस कमरे की ताला तोड़ दी, जिसमें कथित रूप से अध्ययन और ज्ञान का माहौल होना चाहिए था। लेकिन बरामद हुआ सेक्स टॉय, पांच पोर्न सीडी, और कुछ जाली तस्वीरें जिनमें प्रधानमंत्री मोदी, बराक ओबामा और अन्य नेताओं के साथ स्वामी चैतन्यानंद की मिलीजुली नकली छवियाँ थीं।
यह खबर आते ही एक साथ गुस्सा, संदेह, और चौंक उठे बहुत से लोग। क्योंकि, सवाल उठता है कैसे इतना विश्वासघात, इतनी छल-कपट?
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Chaitanyanand Scandal Sex Toy Fake Photos Exposed: छात्राओं की आवाज़: दर्द और भरोसा टूटना
पुलिस की छापेमारी से एक दिन पहले ही, चैतन्यानंद के मोबाइल से व्हाट्सएप चैट्स मिले। लगभग 17 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। जिनमें से 16 ने न्यायालय के सामने बयान भी दिए। एक छात्रा, जो आर्थिक रूप से कमजोर थी, कहती है:
वो हमें विदेश यात्रा का झांसा देता था, नाम लेकर प्यार भरी बातें करता था ‘बेबी’, ‘आई लव यू’… और फिर धमকি, अगर न माना तो ग्रेड कम कर दूँगा।
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इस कथन में सिर्फ शब्द नहीं, विश्वासघात झलकता है एक गुरु, एक प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिसने उनके भरोसे को अपने स्वार्थ में बदल डाला।
वहीं, आरोप है कि कुछ फैकल्टी और वॉर्डन इस खेल में साथ देती रहीं चैट्स डिलीट करतीं, दबाव बनाती थीं। यह सच अगर देखा जाए, तो ज़्यादा खतरनाक लगता है संस्थान में आतंरिक गिरावट।
संस्थान का पक्ष और जड़ों की हेराफेरी
Chaitanyanand Scandal Sex Toy Fake Photos Exposed: चैतन्यानंद 9 अगस्त से फरार था। 28 सितंबर को आगरा से गिरफ्तार किया गया। उस पर पहले से भी छेड़छाड़, धोखाधड़ी जैसे मुकदमे दर्ज हैं। संस्थान से जुड़े आरोपों की लंबी पंक्ति है कथित करोड़ों की हेराफेरी, ट्रस्ट पर कब्जा, फंड ट्रांसफर। छात्राओं को निशाना बनाने की रणनीति तो स्पष्ट है EWS कोटे की छात्राएं, जिन्हें लगता था कि यह संस्थान उनकी उम्मीदें पूरा करेगा। पूरी तरह से इसका पक्ष लेना न सही, पर एक बात माननी होगी कि विश्वास का टूटना कभी कम नहीं किया जा सकता।

जाली तस्वीरें असली इरादे क्या थे?
सबसे चौंकाने वाला मोड़ वह था जब पुलिस को मोदी, ओबामा और अन्य नेताओं के साथ स्वामी की नकली तस्वीरें मिलीं। ये सिर्फ तस्वीरें नहीं थीं एक इमेजरी हथियार। संदेह है कि इनका उद्देश्य था छवि निर्माण, धार्मिक या राजनीतिक वर्चस्व, या अन्य मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना। यह किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि विश्वास और पद की शक्ति का दुरुपयोग है।
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