MLA Priyanka and Guna SP: गुना जिले की चाचौड़ा विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक प्रियंका पेंची ने गुना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकित सोनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एसपी पर मानसिक प्रताड़ना और चाचौड़ा क्षेत्र के थानों में तबादलों में मनमानी का आरोप लगाते हुए 29 मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज की। इस विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।

मानसिक प्रताड़ना का आरोप
प्रियंका पेंची ने अपने पत्र में कहा कि एसपी अंकित सोनी ने उनके साथ एक महिला विधायक के रूप में अपमानजनक व्यवहार किया, जिससे उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी ने उनके विधानसभा क्षेत्र के थानों में तबादलों के दौरान उनकी सलाह को पूरी तरह से नजरअंदाज किया। विधायक ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रियंका ने दावा किया कि यह व्यवहार न केवल उनके प्रति व्यक्तिगत है, बल्कि यह जनप्रतिनिधियों की गरिमा पर भी सवाल उठाता है।

MLA Priyanka and Guna SP: तबादलों में मनमानी का आरोप
विवाद की जड़ 24 मई 2025 को एसपी अंकित सोनी द्वारा जारी तबादला सूची है। इस सूची में चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के तीन थानों में बड़े बदलाव किए गए। चाचौड़ा थाना प्रभारी टीआई मछलू सिंह मंडेलिया को पुलिस लाइन भेज दिया गया, कुंभराज टीआई नीरज राणा को बमोरी थाने और मृगवास एसआई पंकज सिंह कुशवाह को जमनर थाने में स्थानांतरित किया गया। विधायक का कहना है कि इन तबादलों में न तो उनकी और न ही क्षेत्र के प्रभारी मंत्री की सलाह ली गई। उन्होंने इसे प्रशासनिक मनमानी करार दिया और कहा कि यह स्थानीय जनता के हितों के खिलाफ है।
चाचौड़ा क्षेत्र में पहले भी विवाद
चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र पहले भी विवादों में रहा है। 2024 में विधायक प्रियंका पेंची के बहनोई अनिरुद्ध मीणा पर एक कृषि उपनिदेशक को बंधक बनाने और 50 लाख रुपये की मांग करने का आरोप लगा था। इस मामले में अनिरुद्ध के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। हाल के घटनाक्रम ने क्षेत्र में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। प्रियंका पेंची, जो 2023 में चाचौड़ा से भारी मतों से जीती थीं, क्षेत्र में अपनी मजबूत छवि के लिए जानी जाती हैं।
MLA Priyanka and Guna SP: अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव
इस मामले ने मध्य प्रदेश में अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की बहस को फिर से छेड़ दिया है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासन पर जनप्रतिनिधियों का दबाव अनुचित है, जबकि अन्य का कहना है कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की सलाह को नजरअंदाज करना लोकतंत्र का अपमान है। एसपी अंकित सोनी, जो 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, ने अभी तक इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, उनका तर्क है कि तबादले नियमों के अनुसार किए गए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा मामला
यह मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है, और माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा। विधायक प्रियंका पेंची ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे कदम उठा सकती हैं। इस घटना ने न केवल चाचौड़ा बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का माहौल गर्म कर दिया है।
