जब CEC मुस्कुराए: चुनावी सच्चाई और बुर्के के पीछे की बहस

cec on rahul gandhi allegations : बिहार चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी का तापमान जैसे आसमान छूने लगा। हर बार की तरह इस बार भी राहुल गांधी ने तीखे सवाल खड़े किए—फर्जी वोटिंग, SIR की पारदर्शिता, और बुर्कानशीं वोटर्स की जांच की मांग। लेकिन जब ये सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से किया गया, तो उनके चेहरे पर आई एक हल्की सी मुस्कान ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया।
क्या ये मुस्कान जवाब थी या फिर कोई इशारा?
CEC ने बड़ी सहजता से कहा – “69 लाख नाम काटे गए हैं, जो फर्जी, डुप्लिकेट या मृत पाए गए। वोटिंग प्रक्रिया पारदर्शी है और कानून के तहत ही होती है।”
बात बस इतनी नहीं थी। जब सवाल बुर्कानशीं वोटर्स की पहचान पर आया, तो उन्होंने बिल्कुल साफ शब्दों में कहा – “अगर जरूरत पड़ी तो पर्दानशीं महिलाओं की जांच की जाएगी, और इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बूथ पर मौजूद रहेंगी।”
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cec on rahul gandhi allegations: असल मुद्दा क्या है?
राहुल गांधी का आरोप था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में लाखों नाम जानबूझकर काटे गए। उनका कहना है कि यह कदम विपक्ष के वोटर्स को बाहर करने की साज़िश है। मगर CEC ने साफ कर दिया कि ये नाम उन्हीं लोगों के हैं जो या तो मृत हैं, डुप्लिकेट हैं, या फिर भारतीय नागरिक नहीं।
छठ पर्व के बाद चुनाव कराने पर भी सवाल हुआ, जिस पर CEC बोले – “ये राजनीतिक दलों की मांग थी, हम सिर्फ प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।”

और जब 100% वेबकास्टिंग की बात आई, तो उन्होंने कोर्ट की गोपनीयता के फैसलों का हवाला देते हुए कहा – “वोट किसने डाला, यह भी गोपनीय है।”
cec on rahul gandhi allegations: क्यों ये बात सोचने पर मजबूर करती है?
एक तरफ देश में वोटिंग को लेकर भरोसा बहाल करने की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ बुर्का पहनने वाली महिलाओं की पहचान पर सवाल खड़े करना समाज के एक तबके को डराता है। मुख्य चुनाव आयुक्त की मुस्कान के पीछे कानून की कठोरता है या राजनीति का व्यंग्य, ये तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि इस बार बिहार में चुनाव सिर्फ वोट नहीं, बल्कि भरोसे की परीक्षा बन चुके हैं।
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